अचानकमार टाइगर रिजर्व को नया रूप, गांवों का विस्थापन और संरक्षित जंगल की तैयारी
चिरहट्टा, बिरारपानी, तेलाई डभरा में पुनर्वास – आदर्श रिजर्व की दिशा में बड़ा कदम
बिलासपुर/मुंगेली। अचानकमार टाइगर रिजर्व को लेकर एक दूरगामी योजना पर काम शुरू हो गया है। रिजर्व क्षेत्र के भीतर बसे गांवों को विस्थापित कर, उन्हें बेहतर जीवन और सुविधाएं देने की तैयारी है। साथ ही जंगल को पूरी तरह संरक्षित और मानवविहीन बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व्स की तर्ज पर अब अचानकमार को भी विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत जंगल के भीतर मौजूद गांवों को दूसरी जगह बसाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, ताकि टाइगर रिजर्व को और अधिक संरक्षित, शांत और वन्यजीवों के अनुकूल वातावरण में बदला जा सके।मुंगेली वनमंडल अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि शासन की मंशा है कि अचानकमार को एक आदर्श और उच्च गुणवत्ता वाला टाइगर रिजर्व बनाया जाए। इसके लिए विस्थापन एक जरूरी प्रक्रिया है, जिसे व्यापक सोच और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।इसके लिए तीन पुनर्वास स्थलों चिरहट्टा, बिरारपानी और तेलाई डभरा को चिन्हांकित किया गया है। यहां ग्रामीणों को बसाया जाएगा और उनके लिए सभी मूलभूत सुविधाओं का इंतज़ाम किया जाएगा जैसे पक्के मकान, पानी, बिजली, सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाएं।। इससे जहां ग्रामीणों को शहरी सुविधाओं के करीब जीवन मिलेगा, वहीं बाघों और अन्य वन्य जीवों को बिना किसी मानव हस्तक्षेप के जीवन का मौका मिलेगा।यह पहल वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन विस्तार और पर्यावरणीय स्थायित्व की दिशा में छत्तीसगढ़ का एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
वर्जन
हमारा उद्देश्य दोहरा है ग्रामीणों को बेहतर जीवन देना और जंगल को वन्यजीवों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाना। शासन इसे एक आदर्श मॉडल के रूप में देख रहा है।यह योजना केवल विस्थापन नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिकऔर पारिस्थितिक संतुलन का प्रयास है।
अभिनव कुमार डीएफओ मुंगेली