कृषि छात्रों ने किया बीज परीक्षण प्रयोगशाला का शैक्षणिक भ्रमण

बीज गुणवत्ता की बारीकियों से हुए परिचित, व्यवहारिक ज्ञान से समृद्ध हुए छात्र
बिलासपुर, 21 जुलाई।
बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के बी.एस.सी. (कृषि) प्रथम वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने “बीज उत्पादन तकनीकी” पाठ्यक्रम के अंतर्गत शैक्षणिक भ्रमण किया। यह भ्रमण डॉ. अवनीत कुमार, वैज्ञानिक (आनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन) के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण संस्था के अंतर्गत संचालित बीज परीक्षण प्रयोगशाला एवं जी.ओ.टी. प्रक्षेत्र, चोरभट्टी, बिलासपुर का दौरा किया।

व्यवहारिक शिक्षा पर बल दे रही नई शिक्षा नीति
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप, केवल कक्षा शिक्षण तक सीमित न रहकर छात्र-छात्राओं को व्यवहारिक अनुभवों से जोड़ने की दिशा में यह भ्रमण अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। बीज उत्पादन तकनीकी के विविध पहलुओं को प्रत्यक्ष रूप से देखने, समझने और जानने का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे उनके सैद्धांतिक ज्ञान को एक ठोस व्यवहारिक आधार मिला।

बीज परीक्षण की बारीकियों से हुए रूबरू
प्रयोगशाला प्रभारी श्री देवांगन एवं डॉ. भानु प्रिया (बीज विश्लेषक) ने विद्यार्थियों को बीज परीक्षण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की विस्तृत जानकारी दी। छात्रों ने सीखा कि बीजों के परीक्षण हेतु नमूने कैसे एकत्र किए जाते हैं, कार्य नमूने और प्रस्तुत नमूने के बीच क्या अंतर होता है, और किस प्रकार से बीज विभाजकों का प्रयोग करके एक समान और वैज्ञानिक पद्धति से बीजों का विभाजन किया जाता है।

शुद्धता और स्वास्थ्य परीक्षण की मिली जानकारी
विद्यार्थियों को भौतिक शुद्धता तथा आनुवंशिक शुद्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने बीजों में रोगजनक संक्रमण, फफूंदी और अन्य बीमारियों की पहचान तथा बीज स्वास्थ्य परीक्षण की विधियों को प्रत्यक्ष देखा और समझा। साथ ही प्रमुख फसलों में पाई जाने वाली बीज जनित बीमारियाँ कौन-कौन सी हैं, यह भी बताया गया।
अंकुरण परीक्षण व GOT यूनिट का दौरा
बीज परीक्षण की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया – अंकुरण – को भी विद्यार्थियों ने विस्तार से जाना। किस तापमान, आर्द्रता व वातावरण में बीजों का अंकुरण कराया जाता है और अंकुरण प्रतिशत कैसे निर्धारित किया जाता है, इसका व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। इसके अतिरिक्त छात्रों ने GOT (Grow Out Test) यूनिट का भ्रमण किया, जहाँ बीजों की आनुवंशिक शुद्धता की जांच फसल के पौधों को उगाकर की जाती है।
गुणवत्ता युक्त बीज से ही बेहतर उत्पादन संभव
इस भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को यह स्पष्ट हो गया कि बीजों की गुणवत्ता ही किसी फसल की सफलता की मूल कुंजी होती है। यदि बीज अशुद्ध या अस्वस्थ हो, तो संपूर्ण उत्पादन प्रभावित हो सकता है। छात्रों ने जाना कि बीजों की गुणवत्ता के मानक – जैसे शुद्धता, अंकुरण, नमी, स्वास्थ्य, एवं आनुवंशिकता – कैसे जांचे जाते हैं और उन्हें सुनिश्चित करने में प्रयोगशालाओं की क्या भूमिका होती है।
छात्रों का अनुभव
भ्रमण में सम्मिलित छात्र-छात्राओं ने इस शैक्षणिक यात्रा को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें बीज उत्पादन की जटिलताओं को समझने में मदद मिली है और उनके कृषि के प्रति दृष्टिकोण में व्यवहारिक परिपक्वता आई है।
इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण छात्रों को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर उन्हें कृषि विज्ञान की वास्तविक दुनिया से जोड़ते हैं, जिससे उनका समग्र विकास सुनिश्चित होता है।