शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को मिले 16 करोड़ 70 लाख रुपए, उक्त रकम चैतन्य ने लगाया अपने रियल स्टेट प्रोजेक्ट में,ईडी ने विज्ञप्ति जारी कर बताया
शराब घोटाला मामले में ईडी ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया है कि पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल को 16 करोड़ 70 लाख रुपए मिले हैं। इसे चैतन्य ने अपने रियल एस्टेट फर्म के प्रोजेक्ट में खपाया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में आज ईडी ने एक प्रेस रिलीज जारी कर पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल की भूमिका बताई है। ढाई हजार करोड रुपए के शराब घोटाले में ईडी ने बताया है कि चैतन्य बघेल को 16 करोड़ 70 लाख रुपए नगद मिले थे। जिसे उन्होंने अपनी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में लगाया है। पैसे खपाने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से फ्लैट की खरीदी भी की गई। इसके अलावा शराब घोटाले से कमाए गए 1 हजार करोड रुपए से अधिक पीओसी को संभालने का भी आरोप उन पर ईडी द्वारा लगाया गया है।
ईडी के द्वारा जारी प्रेस रिलीज में बताया गया है कि इनफोर्समेंट डायरेक्टरी के रायपुर जोनल कार्यालय ने चैतन्य बघेल पिता भूपेश बघेल को शराब घोटाला मामला जो 2019 से 2022 के बीच हुआ है उसमें धन शोधन निवारण अधिनियम पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के तहत 18 जुलाई को गिरफ्तार किया है। उन्हें विशेष न्यायालय पीएमएलए से 5 दिनों के लिए 22 जुलाई तक ईडी की हिरासत में दिया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य में हुए शराब घोटाले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत एसीबी/ ईओडब्लू रायपुर छत्तीसगढ़ द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की है। पुलिस जांच से पता चला है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ है और अनुचित अपराधों से अर्जित ढाई हजार करोड रुपए से अधिक की आपराधिक आय लाभार्थियों की जेबों में भर गई।
ईडी की जांच से पता चला है कि चैतन्य बघेल को 16 करोड़ 70 लाख रुपए की पीओसी अर्थात आपराधिक आय प्राप्त हुई है। उन्होंने उक्त अपराधिक आय को अपने रियल एस्टेट फर्म में इस्तेमाल किया है। उन्होंने उक्त नगद राशि का उपयोग अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विकास में किया था। पीओसी अर्थात अपराधिक आय का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदारों को नगद भुगतान,नगदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियां आदि के माध्यम से किया गया था। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया। जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने विट्ठलपुरम प्रोजेक्ट में फ्लैटों की खरीदी की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड रुपए प्राप्त किए हैं। बैंकिंग ट्रेल मेल के अवलोकन से यह इंगित करता है की लेनदेन की प्रासंगिक अवधि के दौरान त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त किया है।
इसके अलावा उन पर शराब घोटाला से उत्पन्न 1000 करोड रुपए से अधिक के अपराधिक आय को संभालने का भी आरोप पाया गया है। वह छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष को पीओसी हस्तांतरित करने के लिए अनवर ढेबर और अन्य के साथ समन्वय करते थे। ईडी द्वारा की गई जांच से पता चला है कि इस शराब घोटाले से प्राप्त धन राशि को आगे निवेश के लिए बघेल परिवार के प्रमुख सहयोगियों को भी सौंप दिया गया है। इस धनराशि के अंतिम उपयोग की आगे जांच की जा रही है।
इससे पहले पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा,अरविंद सिंह त्रिलोक सिंह ढिल्लों,अनवर ढेबर,अरुणपति त्रिपाठी, और पूर्व आबकारी मंत्री तथा विधायक कावासी लखनऊ को गिरफ्तार किया गया है। ईडी इस मामले में आगे की जांच कर रही है।