मिशन अस्पताल की ज़मीन पर कमाई का मिशन
लीज खत्म, फिर भी 30 साल से कब्जा…हाईकोर्ट ने दी 30 दिन की मोहलत
बिलासपुर। 1885 में सेवा कार्य के लिए दी गई मिशन अस्पताल की ज़मीन अब विवादों के केंद्र में है। 11 एकड़ ज़मीन पर दिए गए लीज की मियाद 1994 में खत्म हो चुकी थी, लेकिन न तो उसका नवीनीकरण कराया गया और न ही शर्तों का पालन। इसके उलट परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां चलती रहीं और कमाई का ज़रिया बन गया।लीज की शर्तों के अनुसार, निर्माण या किराये पर देने जैसे कार्यों के लिए कलेक्टर की अनुमति जरूरी थी, लेकिन डायरेक्टर रमन जोगी ने इस ज़मीन पर चौपाटी और रेस्टोरेंट तक चलवा दिए। यह मामला जब कलेक्टर अवनीश शरण की नज़र में आया, तो कार्रवाई शुरू हुई। तहसीलदार ने ज़मीन खाली कराने 48 घंटे का अल्टीमेटम थमा दिया।लेकिन मिशन अस्पताल परिसर में वर्षों से रह रहे 17 परिवारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका दावा था कि वे नियमित रूप से बिजली, हाउस टैक्स समेत अन्य बिल भरते रहे हैं और उन्हें बिना सुनवाई ज़मीन खाली करने का आदेश देना अनुचित है। कोर्ट ने मानवीय आधार पर उन्हें 30 दिन की मोहलत दे दी है।हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि तय समय के बाद अगर परिसर खाली नहीं किया गया, तो प्रशासन स्वतंत्र होगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं के पास SDM स्तर पर अपील का विकल्प है। अब देखना ये है कि तीन दशक पुराने कब्जे को सिस्टम कैसे सुलझाता है न्याय से या नियम से।