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मनरेगा कर्मचारियों की ईपीएफ राशि को लेखापाल और डाटा एंट्री ऑपरेटर ने किया गबन, पत्नी के खाते में किया लाखों रुपए ट्रांसफर, उत्तर प्रदेश बॉर्डर से हुए गिरफ्तार

लेखापाल और डाटा एंट्री ऑपरेटर ने कर्मचारियों के 11 लाख से अधिक रुपए की राशि का गबन कर लिया। डाटा एंट्री ऑपरेटर ने अपने पत्नी के खाते में 11 लाख रुपए से अधिक की राशि का ट्रांसफर कर गबन को अंजाम दिया। दोनों आरोपियों को छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया है।

बलरामपुर | छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में जनपद पंचायत वाड्रफनगर से एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। मनरेगा कर्मचारियों के ईपीएफ (EPF) फंड में गबन कर 11 लाख 26 हजार 254 रुपए की धोखाधड़ी का मामला उजागर हुआ है।

इस मामले में तत्कालीन लेखापाल वीरेंद्र कुमार यादव (जनपद पंचायत रामचंद्रपुर में पदस्थ) और डाटा एंट्री ऑपरेटर भगवान सिंह जगते को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने यह राशि डाटा एंट्री ऑपरेटर भगवान सिंह की पत्नी अंजू सिंह के बैंक खातों में ट्रांसफर की थी, जो भारतीय स्टेट बैंक और फिनो बैंक में हैं। इन खातों का संचालन स्वयं भगवान सिंह कर रहा था।

ओटीपी से किया गया फ्रॉड:–

जांच में सामने आया है कि मनरेगा कर्मचारियों के ईपीएफ जमा करने के लिए जो ओटीपी लेखापाल वीरेंद्र कुमार यादव के मोबाइल पर आते थे, उन्हें वह भगवान सिंह को देता था, जो ओटीपी का इस्तेमाल कर ईपीएफ की रकम को अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर कर देता था। यह कृत्य जून 2023 से जून 2025 के बीच किया गया।

CEO की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर:–

जनपद पंचायत वाड्रफनगर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मोहम्मद निजामुद्दीन ने चौकी वाड्रफनगर में लिखित शिकायत दी, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया।

चौकी वाड्रफनगर में अपराध क्रमांक 144/25 के तहत धारा 316(4), 318(3), 3(5) BNS के अंतर्गत मामला कायम कर जांच शुरू की गई।

बॉर्डर से की गई गिरफ्तारी:–

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को छत्तीसगढ़–उत्तर प्रदेश सीमा के पास फुली डूमर क्षेत्र से गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने गबन की बात स्वीकार की। उनके पास से ओटीपी प्राप्त करने वाला मोबाइल, बैंक पासबुक समेत अन्य साक्ष्य बरामद कर लिए गए हैं।

न्यायिक रिमांड पर जेल भेजे गए:–

29 जुलाई 2025 को दोनों आरोपियों को न्यायालय जेएमएफसी वाड्रफनगर में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

टीम की सतर्कता से हुआ खुलासा:–

इस पूरे ऑपरेशन में चौकी प्रभारी उप निरीक्षक धीरेंद्र तिवारी, सहायक उप निरीक्षक पुष्पराज सिंह, साइबर आरक्षक आकाश तिवारी, आरक्षक देव कुमार, रामगोपाल राम, और बालेश एक्का की अहम भूमिका रही

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