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नाबालिग स्कूली बच्चों से जान जोखिम में डाल लगवाया जा रहा था ट्रांसफार्मर, शिक्षा और बिजली विभाग की कार्यशैली पर सवाल

शासकीय हाई स्कूल में नाबालिग बच्चों से ट्रांसफार्मर लगवाने जैसा जोखिम भरा कार्य करवाया जा रहा था। इससे बच्चों की जान पर भी खतरा आ सकता था। साथ ही नाबालिगों से काम करवाना श्रम न्यायालय के कानूनों के खिलाफ भी था। डीईओ ने इसपर कार्यवाही की बात कही हैं।

बिलासपुर। बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के शासकीय हाईस्कूल चनाडोंगरी में सोमवार को ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने शिक्षा और बिजली विभाग दोनों की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी। यहां पढ़ाई करने आए नाबालिग छात्रों को किताब-कॉपी छोड़कर ट्रांसफार्मर लगाने जैसे जानलेवा काम में लगा दिया गया।

बच्चों से रस्सी खिंचवाकर लगवा रहे थे ट्रांसफार्मर:–

मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बिना मजदूरों के स्कूल पहुंचे और छात्रों से ट्रांसफार्मर लगाने के दौरान रस्सी खिंचवाने का काम कराया। यह कार्य न केवल बेहद जोखिम भरा था, बल्कि इसमें बच्चों की जान को सीधा खतरा था। चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरे समय न तो कोई सुरक्षा उपकरण इस्तेमाल किए गए और न ही प्रशिक्षित तकनीशियनों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई।

किसी भी समय हो सकता था बड़ा हादसा:–

बिजली से जुड़े काम के दौरान एक छोटी सी गलती भी बड़े हादसे में बदल सकती है। ऐसे में नाबालिग बच्चों को इस तरह के कार्य में शामिल करना श्रम कानून और बाल संरक्षण से जुड़े सभी प्रावधानों का उल्लंघन है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रस्सी अचानक छूट जाती या तार में कोई गड़बड़ी हो जाती, तो गंभीर दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था।

घटना की जानकारी मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा—“यह बच्चों की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ है। लापरवाही बरतने वाले शिक्षक और संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

गांव में आक्रोश, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग:–

इस घटना ने गांव और आसपास के क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग, बिजली विभाग और स्कूल प्रबंधन—सभी की जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यह केवल एक स्कूल की गलती नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी है।

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