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सीएम से मिलने से पहले छात्रों की गिरफ्तारी….जीजीयू प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप

बिलासपुर ।गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रशासन पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सीड मनी के नाम पर लाखों रुपये कुछ चुनिंदा प्रोफेसरों को बांटे गए, कर्मचारियों के रिश्तेदारों की नियुक्ति की गई, वाई-फाई, कैंटीन और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई। मंगलवार को विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यक्रम के दौरान छात्र सबूतों के साथ उनसे मिलकर शिकायत करने वाले थे, लेकिन कोनी पुलिस ने उन्हें पहले ही हिरासत में ले लिया। एनएसयूआई के विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष सार्थक मिश्रा, सुदीप शास्त्री, शुभम जायसवाल और अवनीत पांडे को धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

धन के दुरुपयोग का आरोप

छात्रों का आरोप है कि कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल विश्वविद्यालय को मनमाने ढंग से चला रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य सरकार ने जीजीयू के लिए 700 एकड़ ज़मीन दी थी, फिर भी स्थानीय छात्रों को मात्र 10 प्रतिशत प्रवेश मिलता है। छात्रों से वसूली गई फीस का दुरुपयोग किया जा रहा है और शोध के लिए दी जाने वाली ‘सीड मनी’ का लाभ वास्तविक परियोजनाओं के बजाय चहेते प्रोफेसरों को दिया जा रहा है।

एनएसयूआई का सरकार पर हमला

एनएसयूआई नेताओं का कहना है कि वे पहले भी कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसीलिए उन्होंने सीएम को सीधे ज्ञापन देने का निर्णय लिया, मगर प्रशासन के इशारे पर पुलिस ने पहले ही छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। एनएसयूआई ने भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अब छात्र अपने ही मुख्यमंत्री से शिकायत तक नहीं कर सकते,आख़िर यह कैसा अमृतकाल है।

कोनी पुलिस ने गिरफ्तार करके घंटो बाद छोड़ा

आंदोलन करने वाले छात्रों को कोनी पुलिस ने मौके से गिरफ्तार किया और थाने में बैठाकर रखा गया, जब सीएम रायपुर के लिए निकल गए तब कही जाकर उन्हें छोड़ा गया।
इस बीच कई नेताओं के फोन आने लगे और छात्रों को छोड़ने की मांग करने लगे।

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