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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका ने अपनी लंबित मांगों को लेकर ध्यानाकर्षण प्रदर्शन किया

300 महिलाओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर सौपा ज्ञापन

बिलासपुर।संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर विचार नहीं हुआ तो 1 सितंबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू की जाएगी। यह प्रदर्शन प्रदेश की सभी जिलों में महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की भागीदारी के साथ किया जाएगा।संगठन की प्रमुख मांगों में कार्यकर्ता और सहायिकाओं को तत्काल शासकीय कर्मचारी घोषित करना, मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत मानदेय वृद्धि, पर्यवेक्षक भर्ती में आयु सीमा हटाकर 50 प्रतिशत पदोन्नति, सहायिकाओं को पदोन्नति और आयु सीमा का बंधन खत्म करना शामिल है। इसके अलावा, पोषण ट्रैकर ऐप में बार-बार आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान, 5जी मोबाइल उपलब्ध कराने, सही प्रशिक्षण देने और आधार लिंकिंग की दिक्कतें दूर करने की भी मांग की गई है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें पोषण आहार ले जाने में हितग्राहियों द्वारा अनावश्यक अड़चनें दी जाती हैं, जो कार्य में बाधा डालती हैं। संगठन ने सेवा समाप्ति पर 10 लाख रुपये देने, सम्मान सुविधा प्रणाली समाप्त करने, गंभीर बीमारी की स्थिति में मेडिकल अवकाश के साथ मानदेय देने, और प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि देने की मांग रखी है। साथ ही, छत्तीसगढ़ महिला कोष की तर्ज पर विभागीय ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की बात भी कही है। अन्य मांगों में ईंधन की राशि समय पर देना, सभी केंद्रों में सिलेंडर और तुलाई मशीन उपलब्ध कराना, सुपोषण चौपाल और मातृत्व वंदन योजना की राशि हर माह जारी करना, और 3 से 6 साल के बच्चों का स्कूल में प्रवेश रोकने के लिए ठोस निर्णय लेना शामिल है संघ ने कहा कि लंबे समय से मांगें लंबित होने के बावजूद शासन-प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। महंगाई और कार्यभार में वृद्धि के बावजूद मानदेय बेहद कम है, जिससे जीवनयापन मुश्किल हो रहा है। महिलाओं का कहना है कि वे गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर बच्चों के पोषण, टीकाकरण, शिक्षा, स्वच्छता अभियान और कई सरकारी योजनाओं में योगदान देती हैं, इसलिए उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है।

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