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पोला़ पर्व की तैयारी, बाजारों में सजने लगे मिट्टी के खिलौने

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्योहार पोला की तैयारी बाजारों में नजर आने लगी है। शहर के विभिन्न बाजारों में साज-सज्जा के साथ मिट्टी से बने बैल, चूल्हा, मटका, कढ़ाई, गंजी समेत अन्य बर्तनों की दुकानों ने रौनक बिखेर दी है। पोला-पिठोरी त्योहार कृषि कार्य और पारंपरिक संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। त्योहार के दौरान किसान अपने सजे-धजे बैलों को घर लाकर विशेष पूजा करते हैं और पश्चात उन्हें गांव में घुमाते हैं। इस अवसर पर कई जगह दंगल जैसे पारंपरिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मिट्टी के बैल और खिलौनों की पूजा के बाद बच्चे इनसे खेलते हैं, जिससे त्योहार में उत्साह का माहौल बनता है। लाल बहादुर शास्त्री स्कूल के पास सज रहे पोला बाजार में इन दिनों खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। खास बात यह है कि बिलासपुर आए प्रवासी लोग भी मिट्टी के खिलौनों की खरीदारी करते देखे गए। उनका कहना है कि विदेशों में ऐसे पारंपरिक खिलौने नहीं मिलते, इसलिए वे बच्चों के लिए यहां से खरीद रहे हैं। इस बार बाजार में मिट्टी के खिलौनों के दामों में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है। मिट्टी के छोटे बर्तन 10 से 30 रुपये तक में बिक रहे हैं, वहीं मिट्टी के बने बैल और बेलगाड़ी 150 रुपये तक में उपलब्ध हैं। हालांकि बारिश के कारण अभी बाजार ठंडा पड़ा हुआ है, लेकिन त्यौहार नजदीक आते ही खरीदारों की संख्या तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ को कृषि प्रधान राज्य माना जाता है और यहां खेती-किसानी में बैलों का विशेष महत्व है। बोआई से लेकर बियासी तक किसान बैलों पर निर्भर रहते हैं। यही कारण है कि पोला पर्व खेती से जुड़े लोगों के लिए आस्था और परंपरा का प्रतीक है। आने वाले दिनों में यह बाजार पूरी तरह रौनक से भर उठेगा।

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