शासकीय स्कूल में शिक्षा की जगह ‘सेवा’ का धंधा, छात्राओं से लगवाई गई मेंहदी

प्राचार्य की संलिप्तता संदेह के घेरे में
बिलासपुर। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले शासकीय हाई स्कूल लोफन्दी, विकासखंड बिल्हा, में एक शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां की शिक्षिकाएं छात्राओं को पढ़ाना छोड़, उनसे निजी कामों के लिए मेहंदी लगवाने में व्यस्त हैं। यह सब स्कूल के एक कमरे में बेरोकटोक चल रहा था, और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसकी पूरी जानकारी स्कूल के प्राचार्य देवांगन जी को थी।
यह घटना शिक्षा व्यवस्था पर एक गहरा धब्बा है। स्कूल, जहां बच्चों का भविष्य गढ़ा जाता है, वहीं छात्राओं को निजी सेवक की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। सवाल उठता है कि क्या सरकारी स्कूल अब सेवा केंद्र बन गए हैं? क्या शिक्षक-शिक्षिकाओं का काम केवल वेतन लेना और बच्चों से निजी काम करवाना ही रह गया है?
प्राचार्य की चुप्पी, मिलीभगत का इशारा?

सूत्रों के मुताबिक, यह कोई एक दिन की घटना नहीं है। शिक्षिकाएं अक्सर छात्राओं से इस तरह के काम करवाती हैं और प्राचार्य देवांगन को इसकी पूरी जानकारी रहती है। उनकी चुप्पी और इस गैर-कानूनी काम को अनदेखा करना उनकी मिलीभगत की ओर साफ इशारा करता है। एक मुखिया का काम होता है अपने संस्थान में अनुशासन बनाए रखना, लेकिन यहां तो मुखिया ही सब जानते हुए आंखें मूंदे हुए हैं।
अभिभावकों में भारी आक्रोश, कार्रवाई की मांग
इस खबर के सामने आने के बाद, अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उन्होंने शिक्षा विभाग से कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे शिक्षकों और प्राचार्य पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जो शिक्षा के पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी स्कूलों में केवल बेहतर सुविधाओं की ही नहीं, बल्कि नैतिक और मानवीय मूल्यों को भी बहाल करने की सख्त जरूरत है। देखना यह है कि क्या शिक्षा विभाग इस मामले में कोई ठोस कदम उठाता है या इसे भी हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।