शिक्षा पर कलेक्टर का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: स्कूलों के लिए जारी हुआ फरमान, शिक्षकों की जवाबदेही तय

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: जिले में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा के गिरते स्तर और सरकारी योजनाओं को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने सख्त कदम उठाए हैं। एक आधिकारिक आदेश जारी कर समस्त संकुल शैक्षिक समन्वयकों को नए और कड़े निर्देश दिए गए हैं। यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुख्य निर्देश:
सख्त निरीक्षण और अध्यापन: संकुल समन्वयक अब हर दिन सुबह प्रार्थना से पहले एक विद्यालय का निरीक्षण करेंगे। उन्हें उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर करना होगा और कम से कम तीन कालांशों तक अध्यापन कार्य भी करना होगा। इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को सीधे तौर पर परखना और शिक्षकों को सकारात्मक सुझाव देना है।
मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता: आदेश में कहा गया है कि समन्वयक मध्याह्न भोजन का नियमित निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि बच्चों को मेनू के अनुसार पौष्टिक भोजन मिल रहा है। प्रत्येक विद्यालय में ‘मध्याह्न भोजन गुणवत्ता पंजी’ का संधारण अनिवार्य किया गया है, जिसमें समन्वयक अपनी टिप्पणी भी दर्ज करेंगे।
शैक्षणिक सुधार पर जोर: छात्रों को गणित की बुनियादी जानकारी, जैसे पहाड़े और अंग्रेजी के पाठ का वाचन कराने पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है, ताकि उनका शैक्षणिक आधार मजबूत हो सके।
पोर्टल पर लंबित कार्य तुरंत पूरे करने के निर्देश: ‘उल्लास’ पोर्टल पर 4000 प्रेरकों में से 1932 और 40,000 शिक्षार्थियों में से 28,000 की प्रविष्टि ही हो पाई है। कलेक्टर ने शेष प्रेरकों और शिक्षार्थियों के सर्वेक्षण और प्रविष्टि का कार्य तत्काल पूरा करने को कहा है।
अन्य महत्वपूर्ण कार्य: ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पोर्टल में प्रविष्टि का कार्य शत-प्रतिशत पूरा करने और रजत जयंती वर्ष 2025-26 के कार्यक्रमों का संकुलवार प्रतिवेदन विकासखंड कार्यालय में जमा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।