व्यावसायिक कर वसूली मामला: ढाबा संचालिका ने कहा ; आरोप निराधार नहीं, सीसीटीवी में कैद घटना के साक्ष्य, सुशासन सरकार से न्याय की आस, निष्पक्ष और उचित कार्रवाई की मांग…

ढाबा संचालकों से टैक्स के नाम पर अवैध वसूली ? पेट्रोल पंप संचालक ने भी जताई नाराजगी
बिल्हा CEO संदीप पोयम के टैक्स वसूली का नायाब अंदाज
बिलासपुर । आधी रात को ढाबा संचालिका से मदनपुर पंचायत के सचिव उनके साथियों और कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बिल्हा के द्वारा व्यावसायिक कर
वसूलने का मामला इन दिनों काफी सुर्खियों में है। जो अब तुल पकड़ने लगा है। ढाबा संचालिका के अलावा क्षेत्र में स्थित एक पेट्रोल पंप के संचालक ने भी इस बाबत मीडिया को जानकारी उपलब्ध कराई है।
दरअसल रतनपुर रोड हाइवे के रानीगांव में स्थित अभय ढाबा एण्ड रेस्टोरेंट की संचालिका चंद्रलेखा बरगाह ने मदनपुर पंचायत के सचिव सहित अन्य साथियों पर 1 लाख 20 हजार रूपये फर्जीवाड़ा (ठगी) करने का आरोप लगाया है। जिस पर पुलिस की विवेचना जारी है।

आरोप निराधार नहीं, आरोपों की पुष्टि के लिए साक्ष्य उपलब्ध
बीते दिनों उक्त मामले में जल्द कार्यवाही की मांग को लेकर अभय ढाबा एण्ड रेस्टोरेंट की संचालिका चंद्रलेखा बरगाह एसपी कार्यालय पहुंची । जहां उन्हें मामले में जांच जारी होने की जानकारी देकर वापस रवाना कर दिया गया, हालांकि इस दौरान वह एसएसपी साहब से मिलकर मामले से जुड़े कुछ साक्ष्यों को प्रस्तुत करना चाहती थीं लेकिन उन्हें ऐसा करने का मौका ही नहीं मिला। जिसके बाद उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उनके आरोप निराधार नहीं है। उनके पास वह सभी साक्ष्य उपलब्ध है जो उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि करते हैं। अब उन्हें सुशासन सरकार से न्याय की आस है ।
व्यावसायिक कर के नाम पर तीन लाख रुपयों की मांग
ढाबा संचालिका ने बताया कि इस दौरान पंचायत सचिव के द्वारा उनसे तीन लाख रुपए की मांग की गई अन्यथा ढाबा बंद करने कहा गया, जिसका वीडियो फुटेज भी उनके पास उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इतने पैसे नहीं होने की बात कहने पर साहब द्वारा ऑनलाइन पैसे देने की मांग की गई, तब उन्होंने केवल 120000/- एक लाख बीस हजार रुपए अपने पास रखे होने की जानकारी उन्हें दी। जिसके बाद उन्हें संतोष तिवारी के द्वारा अलग से बुलाकर समझाया गया और कहा गया कि जितना पैसा है वह अभी दे दो बाकि 15 दिवस के भीतर दे देना, जिसकी रसीद पंचायत द्वारा आपको दी जाएगी। दिए गए पैसे की तत्काल रसीद दिए जाने की मांग पर सचिव के द्वारा स्वयं सुबह लाकर देने की बात कही गई। दूसरे दिन सुबह मदनपुर पंचायत में फोन करके उक्त घटना की जानकारी देते हुए रसीद के सम्बन्ध में पूछताछ की गई, तब उन्हें पता चला कि इस प्रकार के रसीद का प्रावधान पंचायत के अंतर्गत नहीं है। उन्होंने कहा जिसके बाद उन्हें अपने साथ हुए ठगी का अहसास हुआ और पुलिस से मामले की शिकायत की गई।
आधी रात को ही व्यावसायिक कर की भी वसूली
वसूली का यह मामला अब और भी गहराता चला जा रहा है। आधी रात मवेशी पकड़ने निकले सीईओ और उनकी टीम मवेशी पकड़ने के साथ- साथ आधी रात को ही व्यावसायिक कर की भी वसूली कर रहे थे। तुक्का लगा लगाकर ढाबा वालों के पास जा रहे थे, जहां से जो मिल जाए ? आधी रात को व्यावसायिक कर वसूल करने वाले कार्यपालन अधिकारी सहित पंचायत सचिव एवं अन्य लोगो की कार्यप्रणाली संदिग्ध नजर आती है।
अन्य स्थान पर भी पहुंचे थे टैक्स की वसूली करने
बताते चलें कि अभय ढाबा एंड रेस्टोरेंट की संचालिका के द्वारा जिस दिन कर वसूली के नाम पर फर्जीवाड़ा की घटना का जिक्र किया गया है। उस दिन बिल्हा सीईओ अन्य स्थान पर भी टैक्स की वसूली करने पहुंचे थे। भरारी स्थित साईं ढाबा में भी इनकी धमक हुई थी। जो भरारी स्थित पेट्रोल पंप संचालक की निजी भूमि है। बिल्हा सीईओ वहां भी अपने सहयोगियों के साथ व्यावसायिक कर वसूल करने पहुंचे थे । इस दौरान किराया पर ढाबा चलाने वाले श्री पवार ने उन्हें बताया कि जमीन मालिक पेट्रोल पंप में मिलेंगे।
पेट्रोल पंप संचालक ने जताई नाराजगी
उसी रात मदनपुर पंचायत के सचिव, उनके साथी और कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बिल्हा भरारी गांव में स्थित पेट्रोल पंप पहुंच गए। पेट्रोल पंप में जब पंप मालिक नही मिले तब ये लोग सीधे पंप के केबिन में जाकर बैठ गए और उनसे फोन पर वसूली की बातचीत करने लगे। जब पंप संचालक ने उन्हें बताया कि साईं ढाबा जिस जमीन पर बना है । वह उनकी निजी जमीन है। उनकी संपत्ति का कोई कर बकाया नही है। जिसके बाद भी पंप और ढाबा के मालिक से व्यावसायिक कर के नाम पर मांग की गई। पंप संचालक के द्वारा उन्हें समय का भी ध्यानाकर्षण कराया गया और कहा गया कि किसी प्रकार की यदि कोई कर वसूली या कुछ बकाया हो तो उन्हें लिखित में उपलब्ध कराए। जिसके बाद सीईओ साहब अपनी टीम के साथ वहां से बेरंग लौट गए।
सीईओ के नेतृत्व में व्यावसायिक कर वसूली की कार्यवाही
कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बिल्हा (सीईओ) संदीप पोयम ने व्यावसायिक कर वसूली की कार्यवाही को लेकर बताया कि उनके आदेश पर ही यह कार्यवाही की गई है। नोटिस चस्पा किया गया है । किसी प्रकार से राशि की मांग नहीं की गई है। केवल यह कहा गया है कि संपति कर पटाए है कि नहीं पटाए है।
ढाबा संचालिका पर राजीनामा को लेकर दबाव
ढाबा संचालिका चंद्रलेखा बरगाह ने मीडिया को बताया कि समझौता को लेकर उन पर पंचायत सचिव संतोष तिवारी के द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। संतोष तिवारी पुनः उनके ढाबा पहुंचे थे। जहां राजीनामा को लेकर उन पर दबाव बनाया गया। ढाबा में लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरा मांजरा भी कैद है।
“जिला पंचायत सीईओ बोले:” मामले की जाँच पुलिस विभाग कर रही हैं। जांच पड़ताल के बाद ही इस पर विस्तृत जानकारी दे पाएंगे।”
बहरहाल शिकायत की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने संबंधित थाना को उचित कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है। जिस पर पुलिस विवेचना जारी है। जल्द ही मामले का खुलासा हो सकता हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर किसकी बातों में सच्चाई है? क्या ढाबा संचालिका का आरोप निराधार है या मवेशी हटाने की आड़ में भयादोहन कर वसूली की कोशिश की गई?
सुलगते सवाल
क्या व्यावसायिक कर वसूली जैसे शासकीय कार्य किसी भी समय किया जा सकते है, उसके लिए निर्धारित कार्यालयीन समय का कोई औचित्य नहीं ?
क्या बिना किसी रजिस्टर/पंजी में निर्धारण किए बिना किसी को भी नोटिस तामील कराया जा सकता है ?
क्या आधी रात को नोटिस तामील कराया जाना यथोचित हैं और यह विधि विरुद्ध कार्य नहीं है?
क्या किसी भी पंचायत के कर्मचारी/अधिकारी को अन्य दूसरे पंचायत क्षेत्र में कार्रवाई का अधिकार है ? यदि नहीं, तो क्या ढाबा संचालिका के विरुद्ध की गई यह कार्यवाही न्यायोचित है?