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असंभव को संभव बनाने वाली जांजगीर-चांपा पुलिस की सूझबूझ और समर्पण

जांजगीर ।6 सितम्बर की रात्रि को बिर्रा थाना क्षेत्र के ग्राम करही के उपसरपंच महेंद्र बघेल के लापता होने से शुरू हुई चिंता, धीरे-धीरे पूरे जिले के लिए चुनौती बन गई। प्रारंभिक पतासाजी में ही यह प्रकरण संदिग्ध प्रतीत हुआ और शीघ्र ही आरोपियों की गिरफ्तारी एवं पूछताछ से हत्या कर शव को महानदी के तेज बहाव में फेंके जाने की जानकारी प्राप्त हुई।
महानदी जैसी विशाल और बरसाती दिनों में उफान पर चल रही नदी से शव की बरामदगी एक असंभव कार्य जैसा लग रहा था। लेकिन जांजगीर-चांपा पुलिस ने हार नहीं मानी।पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के कुशल मार्गदर्शन में, उप पुलिस अधीक्षक आजाक, थाना बिर्रा, , थाना शिवरीनारायण, थाना बहमनीडीह का बल, कोतवाली का बल,पुलिस लाइन रक्षित केंद्र बल नगर सेना का गोताखोर स्टाफ , फॉरेंसिक टीम,सहित जिले के अन्य थाना/चौकी के अधिकारी-कर्मचारी—सभी ने मिलकर टीमवर्क का परिचय दिया।
लगभग 30 ,35किलोमीटर के दायरे में लगातार ग्रामीणों से संपर्क, गहन खोजबीन, ड्रोन कैमरे का नवाचार प्रयोग तथा ग्रामीणों के आक्रोश व दबाव के बीच कानून-व्यवस्था को बनाए रखना—ये सब अपने आप में एक कठिन चुनौती थी।
आखिरकार टीम की कड़ी मेहनत, धैर्य और रणनीति से महेंद्र बघेल का शव नदी के बीच टापू से बरामद कर लिया गया। आज सुबह से ही विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर शव को परिजनों को सौंपा गया और शांतिपूर्वक अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ।
इस कठिन कार्यवाही के दौरान पुलिस ने न केवल अपराधियों को गिरफ्तार कर साक्ष्य जुटाए, बल्कि ग्रामीणों के आक्रोश को भी धैर्यपूर्वक संभालते हुए उनका विश्वास पुनः अर्जित किया।
यह उपलब्धि केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह उदाहरण है कि— पुलिस संवेदनशीलता के साथ पीड़ित परिवार के दर्द और आंसुओं को समझना जानती है,
जांजगीर-चांपा पुलिस की यह उपलब्धि पूरे बल के लिए प्रेरणा है। यह घटना हमें यह सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी हमारी एकजुटता, साहस और जनता के प्रति जिम्मेदारी हमें सफलता दिलाती है।
इस कार्यवाही में शामिल सभी पुलिस अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण—आपके त्याग, मेहनत और सूझबूझ को जिला पुलिस परिवार गर्व से सलाम करता है।

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