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महेंद्र सिंह को न्याय दिलाने के लिए दस्तावेज संघ का प्रदर्शन

मांगे पूरी नहीं होने पर होगा आंदोलन की चेतावनी

बिलासपुर। दस्तावेज़ लेखक संघ ने मंगलवार को चार सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय हड़ताल की। इस दौरान संघ के सदस्य बड़ी संख्या में जिला कार्यालय परिसर पहुंचे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। संघ ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। यह मामला दस्तावेज़ लेखक ठाकुर महेन्द्र सिंह की गिरफ्तारी से जुड़ा है, संघ का कहना है धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

संघ का कहना है कि ठाकुर महेन्द्र सिंह पिछले 35 से 40 वर्षों से दस्तावेज़ लेखक का कार्य कर रहे हैं। उन्हें शासन से अधिकृत लाइसेंस प्राप्त है और वे हर साल उसका नवीनीकरण भी कराते हैं। इतने लंबे समय में उनके खिलाफ कभी कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई, लेकिन अचानक पुलिस ने उन्हें धोखाधड़ी के प्रकरण में आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया। संघ ने आरोप लगाया कि सरकंडा थाना पुलिस ने मनमानी करते हुए महेन्द्र सिंह को आरोपी बना दिया, जबकि विक्रेता सुरेश मिश्रा के खिलाफ दर्ज शिकायत में उनकी कोई भूमिका ही नहीं थी। संघ का कहना है कि बिना पर्याप्त सबूत और जांच के पुलिस ने 05 सितंबर को सीधे एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की और उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
गिरफ्तारी से नाराज दस्तावेज़ लेखक संघ ने मंगलवार को हड़ताल आंदोलन में पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से न केवल महेन्द्र सिंह बल्कि पूरे दस्तावेज़ लेखक समुदाय का मनोबल टूटा है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर पुलिस अपनी कार्रवाई पर पुनर्विचार नहीं करती तो यह आंदोलन और तेज होगा ।संघ ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को भी स्पष्ट किया, जिसमें महेन्द्र सिंह को तुरंत न्याय दिलाने, गिरफ्तारी की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने और दस्तावेज़ लेखकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे जल्द ही जिला स्तर पर ज्ञापन सौंपेंगे और जरूरत पड़ने पर राज्य स्तर पर भी हड़ताल का आह्वान करेंगे। संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक महेन्द्र सिंह को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या महेन्द्र सिंह को जल्द ही राहत मिलती है या फिर दस्तावेज़ लेखक संघ का यह विरोध और व्यापक रूप लेगा।

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