पौथरोपण योजना की खुली पोल,अधिकारी हुए निलंबित
नाप-जोख से लेकर पौधों तक हुई मनमानी
बिलासपुर/जीपीएम।छत्तीसगढ़ के मरवाही वनमंडल के खोडरी परिक्षेत्र में ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत किए गए वृक्षारोपण में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद परिक्षेत्र अधिकारी मनीष श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। निरीक्षण में पौधों की दूरी, संख्या और गुणवत्ता में बड़ी खामियां पाई गईं। इस मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और वन प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
24 अगस्त 2025 को खोडरी परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 2210 में किए गए वृक्षारोपण कार्य का बिलासपुर वृत्त के मुख्य वनसंरक्षक प्रभात मिश्रा ने निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि:पौधों को निर्धारित मानक दूरी पर नहीं लगाया गया था। केवल 2 इंच से 1 फीट ऊंचाई के पौधों का ही रोपण किया गया, जो योजना की शर्तों के खिलाफ है। रोपड़ तकनीक पर नियंत्रण नहीं रखा गया और साइट पर कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। इन अनियमितताओं के चलते योजना के लक्ष्य प्रभावित हुए हैं। पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को नुकसान पहुंचा है।
मनीष श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने रोपड़ कार्य में आवश्यक गुणवत्ता नियंत्रण नहीं किया और अपने शासकीय दायित्वों के प्रति लापरवाही बरती। जांच में पाया गया कि उन्होंने न तो तकनीकी निर्देशों का पालन किया और न ही कार्य की निगरानी उचित ढंग से की। विभाग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण एवं अपील नियम 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की।
आदेश जारी कर मनीष श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें अचानकमार टाइगर रिजर्व, लोरमी में निर्धारित किया गया है। साथ ही, खोडरी परिक्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार वन परिक्षेत्र अधिकारी पेंड्रा, ईश्वरी प्रसाद खूंटे को सौंपा गया है ताकि वृक्षारोपण कार्य में सुधार लाया जा सके।मनीष श्रीवास्तव को महंगी गाड़ियों का शौक रखने और विभागीय कार्यों में मनमानी करने के लिए पहले भी कई बार विवादों में घेरा गया है। ग्रीन क्रेडिट योजना जैसे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम में उनकी लापरवाही ने सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता को आघात पहुंचाया है।
वन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि योजना में शामिल सभी कार्यों की गुणवत्ता जांची जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योजना को समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराने के लिए संबंधित क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने भी योजना में अनियमितताओं पर नाराजगी जताई है। कई ग्रामीणों का कहना है कि वृक्षारोपण का उद्देश्य तो पर्यावरण सुधार है, लेकिन यदि काम इस तरह से लापरवाही में होता रहा तो योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।