लालखदान हादसे की जांच में रेलवे की गोपनीयता पर सवाल
23 दिन बाद बयान दर्ज,पारदर्शिता से बच रही सिस्टम की पॉलिसी
बिलासपुर ।लालखदान रेल हादसे की जांच में गुरुवार को बड़ा मोड़ आया, लेकिन इस मोड़ के साथ रेलवे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे को 23 दिन बीत चुके हैं, पर जांच की रफ्तार और पारदर्शिता बिल्कुल नाम मात्र की दिखाई दे रही है। इस बीच रेल सेफ्टी कमिश्नर बी.के. मिश्रा बुधवार देर रात गीतांजलि एक्सप्रेस से बिलासपुर पहुंचे और गुरुवार सुबह घायल महिला असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज का बयान रेलवे अस्पताल में गुप्त तरीके से दर्ज किया।
दरअसल इसमें हैरानी की बात यह है कि तीन हफ्तों तक रेलवे यह कहकर बयान टालता रहा कि पीड़ित की हालत खराब है, लेकिन अचानक बिना किसी पूर्व जानकारी के बंद कमरे में बयान ले लिया गया। न मीडिया को अंदर जाने की इजाजत मिली, न ही विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों को पास आने दिया गया। पूरे मामले को जिस तरीके से गोपनीय रखा गया, वह खुद जांच पर संदेह खड़ा कर रहा है।सूत्रों का दावा है कि रश्मि राज के बयान में कई चौंकाने वाली खामियां और सिस्टम फेलियर उजागर हुए हैं। लेकिन रेलवे इस जानकारी को सामने लाने से बच रहा है। सवाल यह उठ रहा है क्या रेलवे को डर है कि सच्चाई सामने आने पर जिम्मेदारी तय हो जाएगी। याद दिला दें कि 4 नवंबर को कोरबा–बिलासपुर मेमू 74 किमी/घंटे की रफ्तार से खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई थी। हादसे में ट्रेन का इंजन, ब्रेकयान और महिला कोच पटरी से उतरकर मालगाड़ी पर चढ़ गया था। एक चालक की मौके पर मौत हो गई थी और 20 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे। विशेषज्ञ शुरू से ही इसे सिग्नलिंग सिस्टम की बड़ी विफलता बता रहे हैं, लेकिन रेलवे आज भी तकनीकी गलती स्वीकार करने से बच रहा है।सीआरएस मिश्रा के बिलासपुर पहुंचते ही जोन और डिवीजन में हड़कंप मच गया।ऑपरेटिंग, इंजीनियरिंग, मैकेनिकल और सिग्नलिंग विभाग ने तत्काल सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दीं। कई कर्मचारियों ने बंद कमरों में हुई पूछताछ को दबाव का माहौल बताया और कहाअगर सब सही है तो जांच से इतना डर क्यों।अब उम्मीद है कि घायल महिला लोको पायलट का बयान जांच को दिशा देगा। लेकिन रेलवे की गोपनीयता, जवाबदेही से बचने वाली रणनीति और मीडिया से दूरी यह साफ संकेत देती है कि कहानी अभी अधूरी है और कई सच भीतर दबे हैं।
ट्रेन हादसे में आखिर किसको बचाने की साजिश
सूत्र बता रहे है कि ट्रेन हादसे में आखिर रेलवे के अधिकारी किसको बचाने की कोशिश करने में जुटे हुए है।क्या इसके पीछे कोई लंबी साजिश है या फिर रेलवे के अधिकारी किसी और को फंसाना नहीं चाहते है।क्योंकि दबी जुबान से कई तरह की बाते हो रही है।लेकिन कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है।