परम आलय जगा गए प्यास, आगे हम करेंगे तलाश – ललित

बिलासपुर।सन टू ह्युमन के संस्थापक परम आलय ने नए दृष्टिकोण के अद्भुत शिविर में छोटे छोटे सूत्रों के माध्यम से काफी गम्भीर व महत्वपूर्ण जानकारी देकर बिलासपुर के जागरूक लोगों में एक गहरी प्यास जाग्रत करने में सफल रहे। नियमित योगी, संतुलित जीवन शैली जीने वाले ललित अग्रवाल ने बताया कि 2 दिसंबर की सुबह से पहल तीन संध्या में शरीर व 4 दिसंबर की शाम से रविवार सुबह तक छह संध्या में मन, भाव, विवेक, बुद्धि की विस्तृत जानकारी के साथ नाभि झटका, कॉस्मिक नटराज जैसे साधारण किंतु असीमित लाभ वाली प्रक्रियाओं के साथ सम्यक आहार, सम्यक व्यायाम और सम्यक नींद से अपने चेतन मन को जाग्रत कर मोक्ष प्राप्त करने के आसान तरीको की विस्तृत जानकारी इतने अल्प समय मे जानकर मन मे प्यास जाग्रत हो गई है। परम आलय ने बताया कि वे कोई नई जानकारी नहीं दे रहे है, अपितु कृष्ण, महावीर, बुद्ध, पतंजलि, ऋषि, गुर्जिएफ ने पहले से ही अपने अपने तरीको से पहले यह सब जानकारी दे गए है। लेकिन एआई के इस युग मे हम केवल एक कान से सुनते है व दूसरे से निकाल देते है। उन्होंने बताया कि मानव शरीर रूपी यह मशीन अनमोल है। लेकिन हमारी निष्क्रियता से पर्दाथ हम पर हावी हो गए है। ललित अग्रवाल ने आगे बताया कि अपने जीवन मे उन्होंने परम आलय जैसी जीवित चेतना पहले कभी नहीं देखी। यह तो बिलासपुर का सौभाग्य है कि ऐसी पुण्यआत्मा के चरणरज पवित्र हो गया है। उनके अन्न से ब्रम्ह बनने के जो तरीके को भाव से अपने जीवन मे उतार कर परीक्षण अवश्य करेंगे। परम आलय का मुख्य सिद्धांत प्रकृति के यूनिवर्सल नियमों को उसके बेसिक से पालन कर दैविक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। जब उन्होंने प्यास जाग्रत ही कर दी है तो इसकी और अधिक तलाश जारी रखनी ही होगी। तामसिक व राजसिक भोजन का त्याग कर केवल सात्विक भोजन अपनाने, लार का सदुपयोग करने व चंद योग से प्रत्येक मनुष्य निरोगी हो सकता है। मां मैत्री, मां सहजो बाई, मां परम भक्ति, शिवालय, कल्कि, रविकिरण जैसे अनेकों परम मित्रों ने कुछ ही दिनों में बिलासपुर के लोगों के हृदय में जगह बना ली है। आज सत्र समापन के समय लगभग तीन हजार साधको की आंखे नम थी। हर दिल से एक ही आवाज आ रही थी कि अगले बरस तुमको आना ही होगा। हर किसी की जुबान पर परम आलय के ओज, तेज, ज्ञान, निर्मलता, सरलता, सादगी की चर्चा होती रही।