हड़ताल हमारी मजबूरी है हड़ताल क्यो जरूरी है -डा सुनील कुमार यादव

बिलासपुर।हड़ताल को लेकर आजकल फिर सरगर्मी गरमा गई है शासकीय दफ्तरों से लेकर मंत्रालय के साथ साथ संचनालय तक सिर्फ हड़ताल के साथ कर्मचारियों के मांग की चर्चा होती है ,कारण स्पष्ट है कि शासकीय कर्मचारियों से शासन काम पूरे कराती है और जब उनके हित अधिकार की बात आने पर मौन हो जाती है उनका अपना सिद्धांत है कर्मचारी कुछ दिन हड़ताल करते है चिल्लाते है नारे लगाते है रैली निकालते है और फिर थककर शांत हो जाते है या नहीं होते है तो अत्या आवश्यक सेवा नियम का भय दिखाकर शांत कराने का गुण जानती है ।
कोई कर्मचारी हड़ताल करना नहीं चाहता है भारत देश के अन्य राज्यो में कर्मचारियों के विषय में शासन स्व निर्णय लेती है और कर्मचारी के मुद्दों को त्वरित निराकृत करती है किंतु छतीसगड़ की स्थिति कुछ और है और यही कारण है कि आज ग्यारह सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों ने तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है
इस विषय पर डा सुनील कुमार ने कहा कि हड़ताल हमारी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने मजबूरी में सड़क पर उतरने शासन के समक्ष बात रखने की मजबूरी है ।हमने हड़ताल को चरणबद्ध किया है प्रथम चरण में भोजन अवकाश में आंदोलन फिर एक दिवसीय अब निश्चितकालीन आंदोलन कर रहे है शासन हमारी मांगे पूरी नहीं करती है तब मजबूरी में अनिश्चित कालीन आंदोलन में जाने की मजबूरी होगी । अभी हम तीन दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे हमारी मांग है कि महंगाई भत्ता की एरियर्स राशि , लिपिकों सहित अन्य सभी कार्गो के वेतन विसंगति के साथ मनोज पिंगुवा जी की अध्यक्षता में गठित टीम की रिपोर्ट को सार्वजनिक करे हमारा सभी कर्मचारियों से अपील है कि वे सभी अपने हक अधिकार की इस संघर्ष में एक साथ सड़क पर आए कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के पंडाल पर आकर अपनी आवाज बुलंद करे ।