शिवम् निकेतन की शानदार प्रस्तुति से हुआ सांस्कृतिक महोत्सव का आगाज़

बारामासी छत्तीसगढ़ी लोकगीत एवं गुजराती नृत्य ने बिखेरी शानदार सांस्कृतिक छटा
बिलासपुर।उन्नत शिक्षा अध्ययन संस्थान, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में शैक्षणिक गरिमा, सांस्कृतिक चेतना एवं रचनात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम 2025–26 का भव्य शुभारंभ अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन शिवम् निकेतन के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की थीम “पीला रंग” रही, जिसने संपूर्ण आयोजन को विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान प्रदान की। इस अवसर पर संस्थान के प्रशिक्षार्थियों, आचार्यगणों, कर्मचारियों एवं आमंत्रित अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर वक्ताओं ने सांस्कृतिक गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अत्यंत सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक मंच के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सहयोग, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक समरसता एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति का विकास होता है। शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में इस प्रकार के कार्यक्रम भावी शिक्षकों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत गणेश स्तुति एवं कृष्ण वंदना से की गई, जिसमें संतोष चंद्र, विरेंद्र मिश्रा एवं प्रांजल महंत की सहभागिता रही। गायन में खेमलता एवं शोषण पाल, छंद प्रस्तुति में जयश्वाल अंजली व प्रतिमा तथा नृत्य प्रस्तुति नैन्सी टोप्पो द्वारा दी गई।
इसके पश्चात् महिला लोक नृत्य – संबलपुरी नृत्य की सशक्त प्रस्तुति भारती ठाकुर, रूपप्रज्ञा, संजना, मल्लिका, ज्ञानदेवी, नैन्सी, अपर्णा, शिवकुमारी, मनीषा एवं गायत्री द्वारा दी गई। गायन में अंजली साहू, प्रतिमा सिदार, नीता साहू एवं शोषण पाल मिज ने प्रस्तुति दी।
वादन (विविध) अंतर्गत बांसुरी वादन की मधुर एकल प्रस्तुति प्रांजल महंत द्वारा दी गई, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

इसके बाद नृत्य-नाटिका – रामायण का मंचन किया गया, जिसमें सौरभ (राम), खेमलता (सीता), अनिल कश्यप (लक्ष्मण), राजेश्वर सिंह (हनुमान), देवकरण दास (रावण), सुरेंद्र देवांगन (राक्षस) सहित हर्ष सिंह, अमित, योगेश, मनीषा, महिमा, नीता, शोषण पाल एवं सीतू सिंह ने प्रभावशाली अभिनय प्रस्तुत किया।
पुरुष लोकगीत – ब्रज गीत की प्रस्तुति में अनिल कश्यप, गजेंद्र सिंह, राजकुमार जगत, तिलक प्रधान, मनोज कुमार, मनोज भोई, अनिल कुर्रे, गंगाराम एवं रमेश कौशिक शामिल रहे।
इसके पश्चात् नृत्य (विविध) – इंडियन स्टेट रिमिक्स में संजना बेग, मल्लिका, गायत्री, रूपप्रज्ञा, दामोदर, हर्ष, अरविंद, ज्ञानदेवी, ओंकार, अंजली, प्रतिमा एवं योगेश ने ऊर्जावान प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण नाटक – ‘अभिशाप’ रहा, जिसमें नरसिंह राठिया (शुक्राचार्य), शिवकुमारी (देवयानी), आयुष (कच्छ), भुवनसिंह एवं अन्य कलाकारों ने सशक्त अभिनय किया।
इसके पश्चात् महिला लोकगीत – छत्तीसगढ़ी बारहमासी गीत की प्रस्तुति अंजली नेहा साहू, प्रतिमा सिदार, नीता साहू, गुड़डी मिश्रा, संतोषी, अहिल्या लहरे, शकुंतला एवं शोषण पाल द्वारा दी गई।
पुरुष लोक नृत्य – पंथी नृत्य में दामोदर सिदार, आयुष यादव, ओंकार, अरविंद, अमित, प्रांजल, योगेश, सीतू एवं हर्ष ने नृत्य प्रस्तुत किया।
प्रहसन (विविध) – छत्तीसगढ़ी कॉमेडी में सुजन महंत की एकल प्रस्तुति ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया।
इसके बाद नृत्य (विविध) – गरबा में रूपप्रज्ञा, संजना, मल्लिका, भारती, नैन्सी, अपर्णा, ज्ञानदेवी, शिवकुमारी एवं गायत्री ने प्रस्तुति दी।
लघु नाटिका – ‘वंदे मातरम्’ में सुजन महंत, तिलक प्रधान, खेमलता साहू, अनिल कश्यप, पवन सोनी, अमित, सीतू सिंह, अनिल कुर्रे एवं गुड़डी मिश्रा ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का समापन निकेतन समूह गीत – ‘जय जय जय भारत माता’ से हुआ, जिसमें समस्त निकेतन सदस्यों ने सहभागिता कर राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण निर्मित किया।
इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य एवं आचार्यगणों ने आयोजन समिति एवं प्रतिभागी प्रशिक्षार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय भावना, सामूहिक सहभागिता एवं आत्म-अभिव्यक्ति के विकास का सशक्त मंच भी सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन सुजन महंत, पवन सोनी एवं सौरभ अग्रवाल द्वारा किया गया।
कार्यक्रम की सफलता में संस्थान के मेंटर एवं आचार्यगणों का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस अवसर पर डॉ. रीमा शर्मा, सौरभ सक्सेना, संजय शर्मा, डॉ. विद्या भूषण शर्मा, श्रीमती सोनल जैन एवं जितेन्द्र साहू का सहयोग, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा प्रशिक्षार्थियों के लिए विशेष रूप से सराहनीय रही। इनके सतत मार्गदर्शन से यह सांस्कृतिक आयोजन सफल, अनुशासित एवं स्मरणीय बन सका।
इस अवसर पर कार्यक्रम के निर्णायक के रूप में सुनील चीपड़े एवं अरुण भागे जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही महाविद्यालय परिवार की प्राचार्य मीता मुखर्जी, सांस्कृतिक प्रभारी डॉ अजिता मिश्रा,बी.एड. प्रभारी प्रीति तिवारी, अंजना अग्रवाल, राजेन्द्र तिवारी, डॉ. नीला चौधरी, करीम खान, डॉ. सलीम जावेद समेत समस्त आचार्य उपस्थित रहें।