वेतन पीएफ की मांग पर रेलवे ड्राइवरों का आंदोलन, जीएम कार्यालय से पहले रोकी गई रैली

आरपीएफ हस्तक्षेप के बाद श्रम विभाग में सुनवाई, 13 जनवरी को बैठक का भरोसा
बिलासपुर ।दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के वाहन चालकों का सब्र उस वक्त जवाब दे गया, जब वर्षों से लंबित वेतन और सेवा संबंधी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। अपनी मांगों को लेकर जीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे वाहन चालक संघ को आरपीएफ ने बीच रास्ते में ही रोक लिया, जिसके बाद पूरा मामला केंद्रीय श्रम विभाग तक पहुंचा।
वाहन चालक संघ का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से ठेकेदारों के माध्यम से रेलवे अधिकारियों को सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन बीते करीब पांच वर्षों से वेतन में कोई वृद्धि नहीं हुई। 13 फरवरी 2024 को एकदिवसीय हड़ताल के दौरान तीन माह में वेतन, पीएफ और समय-सारणी तय करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन 21 माह बीत जाने के बाद भी वादे पूरे नहीं हुए।इसी नाराजगी के चलते चालक संघ भारत माता स्कूल के पास से पैदल रैली निकालकर जीएम कार्यालय के बाहर धरना देने जा रहा था। डीआरएम कार्यालय के पहले ही डीआईजी और एसपी अतरी के निर्देश पर भारी संख्या में आरपीएफ और तोरवा स्टाफ तैनात किया गया और सभी प्रदर्शनकारियों को रोककर पहले आरपीएफ पोस्ट ले जाया गया।बाद में सभी वाहन चालकों को केंद्रीय श्रम विभाग, तोरवा जगमल चौक भेजा गया, जहां संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा और मांगें रखीं। इसमें वेतन 17 हजार से बढ़ाकर 22 हजार रुपये करने, पीएफ की पूरी सुविधाएं, हर वर्ष 12 से 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि, ओवरटाइम भुगतान और राष्ट्रीय अवकाशों में डबल भुगतान जैसी प्रमुख मांगें शामिल रहीं।केंद्रीय श्रम विभाग के अधिकारी ने करीब एक घंटे तक सभी पक्षों की बात ध्यानपूर्वक सुनी और संयम बनाए रखने की अपील की। अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि चालकों की हर समस्या को गंभीरता से लेते हुए रेलवे प्रशासन के साथ चर्चा की जाएगी।अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आगामी 13 जनवरी को रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आवश्यक बैठक कर पूरे मामले में निर्णय लिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद सभी ड्राइवर संघ आंदोलन समाप्त करने पर सहमत हुए और वापस काम पर लौट गए। फिलहाल बातचीत से समाधान की उम्मीद जगी है,हालांकि अब 13 जनवरी की बैठक पर सबकी उम्मीदें टिकी हैं।