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सीएम की हाई प्रोफाइल बैठक, बिलासपुर में सरकारी दफ्तर बने श्मशान…

रायपुर में अफसरों की मीटिंग, बिलासपुर में ठप पड़ा सरकारी कामकाज….

मुख्यमंत्री की बैठक का साइड इफेक्ट,बिलासपुर के दफ्तरों में रामराज….

बैठक रायपुर में, परेशानी बिलासपुर की जनता को….

बिलासपुर ।मंगलवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में एक हाई प्रोफाइल बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में पूरे प्रदेश से वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक को लेकर बिलासपुर से भी बड़ी संख्या में अधिकारी रायपुर रवाना हुए, जिसका सीधा असर जिले के सरकारी दफ्तरों पर देखने को मिला।बिलासपुर में सुबह से ही कई सरकारी कार्यालयों में सूना-सूना माहौल नजर आया। अधिकारियों के रायपुर रवाना होते ही कई विभागों में कर्मचारी भी अपने-अपने कार्यालयों से नदारद दिखाई दिए। हालात ऐसे रहे मानो दफ्तरों में “राम राज्य” आ गया हो। कई कार्यालयों में ताले लटके मिले, तो कहीं सिर्फ चपरासी या सीमित स्टाफ ही मौजूद नजर आया।सरकारी कामकाज पर इसका साफ असर पड़ा। रोजमर्रा के काम से आए आम नागरिकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। आवेदन, शिकायत और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े काम पूरे नहीं हो सके। लोगों का कहना है कि वे सुबह से कार्यालयों के चक्कर काटते रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौजूद नहीं मिले।बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री की बैठक में विभागीय समीक्षा, विकास कार्यों और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा होनी है, इसी वजह से प्रदेशभर के अधिकारी रायपुर पहुंचे हैं। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि अधिकारियों के साथ-साथ कर्मचारियों का भी दफ्तरों से गायब रहना कितना जायज है।शहर के कई प्रमुख सरकारी कार्यालयों में यही हाल देखने को मिला। आम जनता को उम्मीद थी कि कम से कम कर्मचारियों के स्तर पर कामकाज चलता रहेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। अब बड़ा सवाल यही है कि जब अधिकारी बैठक में हों, तो क्या आम जनता के कामकाज ठप हो जाना चाहिए? क्या प्रशासन को ऐसी व्यवस्था नहीं करनी चाहिए जिससे सरकारी सेवाएं प्रभावित न हों?फिलहाल, मुख्यमंत्री की बैठक जारी है, लेकिन बिलासपुर में सरकारी दफ्तरों की यह स्थिति प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर रही है।

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