बिल्हा ब्लॉक के सहायक शिक्षकों का शिक्षा विभाग के खिलाफ हल्लाबोल….वरिष्ठता सूची को लेकर सहायक शिक्षकों का विरोध तेज

वरिष्ठता विवाद ने पकड़ा तूल,शिक्षक बोले,जूनियर को बनाया सीनियर अब हमको उनके नीचे काम करना पड़ रहा
बिलासपुर । शिक्षा विभाग में एक से बढ़कर एक विवाद सामने आ रहा है।
कभी पदोन्नति को लेकर ज्ञापन आ रहा है तो कभी जूनियर को सीनियर बनाकर बैठा देने का मामला सुर्खियों में बना हुआ है।देखा जाए तो प्रदेश भर के हजारों शिक्षक अपनी पदोन्नति को लेकर फिर से कोर्ट तक जाने को तैयार है।इसमें उन्होंने मंत्री,कलेक्टर और डीईओ तक को ज्ञापन सौंपा है,बावजूद इसके सुनवाई नहीं हुई है।बल्कि वंचित शिक्षकों का आरोप है कि अब तो कोर्ट के आदेश की भी अवहेलना की गई है।

दरअसल पदोन्नति में वरिष्ठता को लेकर सहायक शिक्षकों ने एक साथ मोर्चा खोल दिया है। शिक्षकों का गंभीर आरोप है कि शिक्षक विभाग हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से वरिष्ठता सूची तैयार कर रहा है,जिससे उनकी पदोन्नति पर संकट खड़ा हो गया है।अब उनको सीनियर होते हुए भी जूनियर के अंदर रहकर जूनियर बनकर काम करना पड़ेगा।इससे उनको लॉस है और ऐसे में पदोन्नति के लिए वंचित हो जाएंगे।जबकि नियम यही कहता है
कि 2005 से अगर कोई भर्ती हुआ है और वह 2008 मे तबादला होकर बिलासपुर आया है तो उसकी गिनती 2005 से ही की जाएगी।लेकिन यहां पर 2008 वालो को पदोन्त करके उनको पदोन्नति की जा रही है।जिससे वरिष्ठता शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित होना पड़ रहा है।
दरअसल पूरा मामला बिल्हा विकासखंड का है,जहां वर्ष 2025 की नई वरिष्ठता सूची का सहायक शिक्षकों ने विरोध किया है। शिक्षकों का कहना है कि स्थानांतरण लेकर आए शिक्षकों की वरिष्ठता उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से तय होनी चाहिए, लेकिन विभाग कार्यभार ग्रहण करने की तिथि को आधार बना रहा है, जो पूरी तरह गलत है।पीड़ित शिक्षकों ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि वे वर्ष 2005 से शिक्षाकर्मी के रूप में सेवा दे रहे हैं। स्थानांतरण के बाद उनकी पुरानी सेवा अवधि को नजरअंदाज कर उन्हें हजारों क्रमांक पीछे कर दिया गया है।शिक्षकों का तर्क है कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फरवरी और दिसंबर 2025 के अपने आदेशों में साफ कहा है कि स्थानांतरण के बावजूद वरिष्ठता प्रथम नियुक्ति तिथि से ही तय होगी। यही नहीं, जुलाई 2018 में हुए संविलियन में भी उनकी पिछली आठ वर्षों की सेवा को मान्यता दी गई
थी।
शिक्षकों की चेतावनी,सुनवाई नहीं हुई तो जाएंगे कोर्ट
शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द वरिष्ठता सूची में सुधार नहीं किया गया, तो वे कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेंगे। इस विवाद से हजारों शिक्षकों की पदोन्नति की उम्मीदें अधर में लटक गई हैं। जबकि इसके लिए पिछले 5 साल से लड़ाई चल रही है बावजूद इसके सुनवाई नहीं हो रही है।
शिक्षक बोले,वंचित करके पदोन्नति से कर दिया बाहर
गौरेला पेंड्रा से तबादले में पहुंचे ओम प्रकाश कश्यप का कहना है कि वे 2005 के बिलासपुर आए है।इसमें उनकी भी वरिष्ठता खत्म के दो गई है।पदोन्नति से वंचित हो गये है।और जूनियर शिक्षकों के अंदर काम करना पड़ेगा।जूनियरों को सीनियर बनाकर पदोन्नत किया गया है।
इसी तरह धनिष्ठा पाण्डेय ने बताया कि वे मुरूम खदान स्कूल में पढ़ाती है।और वे भी पदोन्नति में आ रही है।लेकिन वंचित हो गई है जबकि वे खुद 2005 की है और तबादले पर पहुंची हुई है।लेकिन शिक्षा विभाग के बिल्कुल अनदेखी कर दी गई है और शिक्षकों की समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही है।
वही देव कुमार मरावी का कहना है कि जिनका पदोन्नति करना था कर दिए है जिसकी सूची भी जारी कर दी गई है। और हमको ऊपर क्रम में रखा गया है।जबकि हाईकोर्ट के भी वरिष्ठता समाप्त नहीं होगी करके आदेश जारी किया है उसके बाद भी शिक्षा विभाग अपनी मनमानी करके कोर्ट की अवमानना कर रहा है।इसलिए सरकार से मांग करेंगे कि शिक्षकों की सुनवाई हो और जो इसके हकदार है उनको पदोन्नत करके पदोन्नति किया जाए।अन्यथा फिर से कोर्ट जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
प्रदेश के 27 हजार शिक्षक होंगे वंचित
अगर यही हाल रहा तो पदोन्ति से प्रदेश 27 हजार शिक्षक वंचित होंगे और जूनियरों के साथ काम करना पड़ेगा।इसमें सहायक शिक्षक,शिक्षक एवं व्याख्याता शामिल है जो प्रभावित होंगे,जो पदोन्नति को लेकर काफी पीछे रहेंगे ।
3 साल से लेकर 5 साल तक का होगा लॉस
शिक्षकों के बत्ता की इसमें 3 साल से लेकर 5 साल तक के शिक्षकों को काफी लॉस होगा।जो हकीकत में इसके असली हकदार है।लेकिन उनको दरकिनार करके जूनियरों को सीनियर बनाया गया है।जिसके कारण वंचित शिक्षकों के काफी नाराजगी बनी हुई है।
जूनियर से भी जूनियर बनकर करेंगे काम
वंचित शिक्षकों ने बताया कि जिस तरह से शिक्षा विभाग के अपनी मनमानी की है और जूनियर शिक्षकों को पदोन्नत करके सीनियर बनकर भेजा है उससे पूरे लोगो के आक्रोश बना हुआ है और अब जूनियर से भी जूनियर बनकर काम करना पड़ेगा जो किसी को बरदाश्त नहीं होगा।
2008 से गणना किया जा रहा वरिष्ठता सूची में
शिक्षकों ने बताया कि शिक्षा विभाग 2008 से गणना करके पदोन्नत कर रहा है जबकि 2005 की भर्ती में गणना होनी चाहिए।जिसके कारण एक नहीं बल्कि हजारों शिक्षक बर्बाद हो रहे है।2005 से गणना होने पर पूरे शिक्षकों की पदोन्नति हो जाएगी और कही कोई भेदभाव नहीं रहेगा।
वरिष्ठता प्रभावित शिक्षकों ने सौंपा ज्ञापन
बिलासपुर जिला व बिल्हा ब्लॉक के वरिष्ठता प्रभावित स्थानांतरित शिक्षकों ने ज़िल शिक्षाधिकारी एवं ब्लाक शिक्षाधिकारी को अपने वरिष्ठता प्रदान करने के लिए ज्ञापन सौंपा! स्थानांतरित शिक्षक जो स्थानांतरण करा कर आए हैं,उनको प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता न देकर स्थानांतरण तिथि से वरिष्ठता की गणना की जा रही है जो की गलत हैं! जबकि स्थानांतरण शासन के नीति नियम के तहत हुआ हैं! तो स्थानांतरित शिक्षकों को जिस वर्ष नियुक्त हुआ है उसी वर्ष स्थान देना चाहिए । इसमे सबसे ज्यादा प्रभावित महिला शिक्षिकाओ की है! क्योंकि बहुत सारे शिक्षिकाएं जिनका अपने मायके में नियुक्त हुई हैं और शादी के बाद अपने ससुराल गई हैं! तो उनका वरिष्ठता प्रभावित हो रही हैं! चाहे वह दस या पंद्रह साल क्यो न सर्विस किया हो! इस विषय पर शासन प्रशासन से कई बार निवेदन/ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया गया लेकिन आज तक इस समस्या का समाधान नहीं किया गया! इससे व्यथित होकर कुछ शिक्षक साथियों ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया और उच्च न्यायालय दुबारा सुनवाई की गई! जिसमे शिक्षकों को वरिष्ठता प्रथम नियुक्ति तिथि से गणना करने की आदेश राज्य सरकार को किया है ।
ज्ञापन सौंपने वाले पहुंचे शिक्षक
ज्ञापन सौंपने वाले में श रामबाई चौधरी,देवकुमार मरावी,ओमप्रकाश कश्यप, मधु वस्त्रकार ,घनिष्ठा पांडेय, कल्पना महंत,भारद्वाजधन्नु लास्कर आदि सैकड़ो शिक्षक -शिक्षिकाएं उपस्थित रहे!