मॉडल स्कूल खुद संकट में आत्मानंद स्कूलों में नर्सरी बंद होने की आहट

सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल आत्मानंद स्कूलों में उथल-पुथल…
17 शिक्षिकाओं की नौकरी खतरे में, आत्मानंद स्कूलों में हड़कंप ..
मौखिक आश्वासन,लिखित सेवा समाप्ति- शिक्षिकाओं में डर….
बिलासपुर। जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिन स्वामी आत्मानंद स्कूलों को कभी मॉडल स्कूल की पहचान मिली थी, आज वही स्कूल खुद संकट के दौर से गुजर रहे हैं। जिले के चार स्वामी आत्मानंद स्कूलों में नर्सरी, केजी और एलकेजी में पढ़ने वाले करीब 300 मासूम बच्चों का भविष्य अनिश्चितता में घिर गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक जिला खनिज संस्थान न्यास यानी डीएमएफ से फंड नहीं मिलने के कारण प्रशासन ने नर्सरी कक्षाएं बंद करने का निर्णय लिया है। इस फैसले का सीधा असर स्कूलों में कार्यरत 17 शिक्षिकाओं और कर्मचारियों पर पड़ रहा है, जिनकी नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। नर्सरी कक्षाएं बंद होने से न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी, बल्कि उन शिक्षकों का भविष्य भी अधर में लटक जाएगा, जिन्होंने चयन प्रक्रिया और इंटरव्यू पास कर इन स्कूलों में अपनी सेवाएं दी हैं।नौकरी पर संकट के बीच आज सभी प्रभावित शिक्षिकाएं जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे से मिलने पहुंचीं। शिक्षिकाओं का कहना है कि उन्हें बिना किसी ठोस कारण के नौकरी से हटाने की बात कही जा रही है। उन्होंने बताया कि जब से नर्सरी कक्षाएं बंद करने का निर्णय सामने आया है, तब से वे मानसिक तनाव में हैं। शिक्षिकाओं ने प्रशासन से समायोजन और नौकरी को स्थायी करने की मांग की है। उन्होनें बताया कि वे सभी इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया पास कर यहां नौकरी पाई है। उन्होनें बताया कि उन्हें सिर्फ मौखिक आश्वासन मिल रहा है, लेकिन लिखित में 8 फरवरी तक सेवा समाप्ति का पत्र दिया गया है। इससे हम सभी डरी हुई हैं। शिक्षिकाओं का कहना है कि उन्हें सिर्फ इस सत्र तक नौकरी रहने का मौखिक आश्वासन दिया गया है, लेकिन अगले सत्र को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। उनका आरोप है कि आज तक छत्तीसगढ़ में संविदा कर्मचारियों को इस तरह नौकरी से नहीं निकाला गया, लेकिन अब उनके साथ ऐसा हो रहा है।
वर्जन
इस शैक्षणिक सत्र तक नर्सरी कक्षाएं संचालित होंगी और शिक्षकों को नियमित रूप से रखा जाएगा। अगले सत्र को लेकर फिलहाल कलेक्टर स्तर से कोई आदेश नहीं आया है, इसलिए अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।
विजय टांडे
जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर