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अचानकमार में घायल बाघ लापता

वन विभाग की चुप्पी से उठे सुरक्षा पर सवाल

बिलासपुर।अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत के बाद अब घायल बाघों के लापता होने का मामला सामने आया है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीसीसीएफ स्तर के निरीक्षण के बावजूद न तो कोई ठोस जानकारी सामने आई और न ही अधिकारी मीडिया के सवालों का जवाब देने को तैयार नजर आए।

दरअसल घटना 25 जनवरी की है, जब अचानकमार टाइगर रिजर्व के अचानकमार परिक्षेत्र अंतर्गत सारसडोल परिवृत्त के कुडेरापानी कक्ष क्रमांक 120 आरएफ में पेट्रोलिंग के दौरान करीब दो वर्षीय एक नर बाघ मृत अवस्था में मिला। मौके पर संघर्ष के स्पष्ट संकेत पाए गए, जिनमें टूटे पौधे, खरोंच और बाल शामिल थे।पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ की मौत का कारण दो बाघों के बीच हुआ हिंसक संघर्ष बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मृत बाघ की गर्दन की हड्डी टूट गई थी और गर्दन पर दूसरे बाघ के दांतों के निशान भी पाए गए थे, जिससे आपसी संघर्ष की पुष्टि होती है।घटना के बाद मंगलवार को पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ अरुण पांडेय ने जंगल के भीतर पहुंचकर सुबह से शाम तक निरीक्षण किया। इस दौरान डीएफओ यू.आर. गणेश सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे, लेकिन निरीक्षण के बाद भी किसी नए तथ्य या निष्कर्ष की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि संघर्ष में घायल बताए जा रहे दो अन्य बाघ अब तक लापता हैं। आशंका जताई जा रही है कि घायल अवस्था में वे शिकार का शिकार भी हो सकते हैं, लेकिन इस गंभीर विषय पर वन विभाग खुलकर कुछ भी कहने से बचता नजर आ रहा है।मीडिया द्वारा बार-बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद अधिकारी कैमरे से दूरी बनाते रहे। न कोई बाइट दी गई और न ही घायल बाघों की स्थिति पर स्पष्ट बयान सामने आया। पीसीसीएफ स्तर के निरीक्षण के बाद भी सूचना का अभाव वन्यजीव सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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