सर्पदंश मुआवजा घोटाला: फर्जी दस्तावेज से 4 लाख की सहायता हड़पी…महिला समेत अन्य पर FIR दर्ज

बिलासपुर – तखतपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम चना डोंगरी में सरकारी सहायता राशि से जुड़ा एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें जाली दस्तावेजों और फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए शासन को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। मामले में आवेदिका उर्वशी श्रीवास द्वारा अपने पति की मौत को सर्पदंश बताकर चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्राप्त करने का खुलासा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार उर्वशी श्रीवास ने तहसीलदार कार्यालय तखतपुर में आवेदन देकर दावा किया था कि उनके पति पुरुषोत्तम श्रीवास की मृत्यु सांप के काटने से हुई है। इसी आधार पर उन्हें शासन की ओर से 4 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर दी गई। हालांकि बाद में मामले की जांच शुरू होने पर पूरी कहानी संदिग्ध पाई गई। कलेक्टर के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय जांच दल, जिसमें तहसीलदार, थाना प्रभारी और चिकित्सा अधिकारी शामिल थे, उन्होंने जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए। रिपोर्ट में सामने आया कि आवेदिका ने जिस मर्ग क्रमांक 23/2022 का हवाला दिया था, वह वास्तव में किसी अन्य व्यक्ति शोभाराम कौशिक का था, जिसने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। सरकारी रिकॉर्ड में पुरुषोत्तम श्रीवास की सर्पदंश से मृत्यु का कोई उल्लेख नहीं मिला।
जांच में यह भी सामने आया कि सहायता राशि स्वीकृति आदेश पत्र पर तत्कालीन तहसीलदार के हस्ताक्षर फर्जी थे। संबंधित अधिकारी ने लिखित रूप से पुष्टि की कि दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इसके अलावा मृतक के ससुर और साले के बयानों में भी आवेदिका के दावे झूठे साबित हुए। उन्होंने बताया कि पुरुषोत्तम को कई महीने पहले सांप ने काटा था, जिससे वह लकवाग्रस्त हो गया था और बाद में उसकी घर पर सामान्य मृत्यु हुई थी। न तो उस समय कोई सर्पदंश की घटना हुई थी और न ही पोस्टमार्टम कराया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार की शिकायत पर पुलिस ने उर्वशी श्रीवास एवं अन्य के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 34 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुट गई है।