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दागी सहायक अभियंता के ‘ट्रांसफार्मर कांड’ पर ईई ने बिठाई जांच

60 हजार में बिका CSEB का नियम! ‘ट्रांसफार्मर कांड कि जाँच शुरू.

आशीष मौर्य बिलासपुर।बिजली विभाग के सकरी उप संभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा खबर के माध्यम से हुआ है। गनियारी वितरण केंद्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नरोत्तिकापा में पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से ट्रांसफार्मर बदलने के मामले को प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद, विभाग के उच्च अधिकारियों ने संज्ञान लिया है। कार्यपालन अभियंता (EE) अनुपम सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

​आरोप है कि सकरी के सहायक अभियंता प्रमोद कुमार चौबे ने अपने लाइनमैन प्रवीण साहू के साथ मिलकर नरोत्तिकापा के सतनामी मोहल्ला में ग्रामीणों से 60,000 रुपये की अवैध वसूली की। इस मोटी रकम के बदले, बिना किसी कागजी कार्यवाही या विभागीय अनुमति के, पुराने 63 KVA ट्रांसफार्मर को हटाकर 100 KVA का नया ट्रांसफार्मर लगा दिया गया। यह सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति का निजी स्वार्थ के लिए उपयोग और राजस्व को चूना लगाने का मामला है।

विवादों का पुराना दामन

​प्रमोद चौबे का नाम पहले भी 60 करोड़ रुपये के RDSS घोटाले में उछल चुका है, जिसके कारण उन्हें निलंबन का सामना करना पड़ा था। अभी दो महीने पहले ही उनकी बहाली कर उन्हें सकरी में पदस्थ किया गया था। पदस्थापना के कुछ ही समय बाद, उनके क्षेत्र की एक कॉलोनी में रायपुर-भिलाई की संयुक्त विजिलेंस टीम ने 48 लाख रुपये की बिजली चोरी पकड़ी थी। चर्चा है कि इस मामले में भी एई की कॉलोनाइजर से गहरी साठगांठ थी।

पक्षपात के आरोप और कार्रवाई की मांग

​हैरानी की बात यह है कि जहाँ लोरमी में महज 17 लाख की बिजली चोरी पर वहां के सहायक अभियंता को तुरंत सस्पेंड कर मुख्यालय अटैच कर दिया गया, वहीं प्रमोद चौबे पर तमाम गंभीर आरोपों और घोटालों में नाम आने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही थी। विभाग के भीतर दबी जुबान में इसे ‘ऊपरी कृपा’ का नाम दिया जा रहा है।

ईई अनुपम सरकार का एक्शन

​लोकस्वर न्यूज़ द्वारा सबूतों के साथ खबर दिखाए जाने के बाद कार्यपालन अभियंता अनुपम सरकार ने स्पष्ट किया है कि विभागीय नियमों के विरुद्ध जाकर किए गए किसी भी कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जांच दल गठित कर जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा है। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार भी ‘खास कृपा’ आरोपी अधिकारी को बचा लेती है या विभाग सख्त कार्रवाई कर एक मिसाल पेश करता है।

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