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101 आंगनबाड़ी बिना भवन, 35 जर्जर—नन्हें बच्चों का भविष्य जोखिम में

किराए, स्कूल और पंचायत भवनों में चल रही पढ़ाई, बुनियादी सुविधाओं का टोटा

कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने विधानसभा में उठाया मामला

बिलासपुर।नौनिहालों की शुरुआती शिक्षा और पोषण का सबसे अहम केंद्र माने जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत कोटा में चिंताजनक बनी हुई है। विधानसभा में उठे सवाल के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वे सिस्टम की जमीनी हकीकत बयां कर रहे हैं। यहां 324 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, लेकिन इनमें से 101 केंद्र आज भी बिना भवन के हैं, जबकि 35 भवन जर्जर हालत में खड़े हैं—जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने महिला एवं बाल विकास विभाग से सवाल पूछकर स्थिति साफ की। जवाब में मंत्री ने स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में केंद्र या तो बिना भवन के चल रहे हैं या खस्ताहाल हैं।
जहां पढ़ रहे बच्चे, वहां नहीं हैं सुविधाएं
भवन विहीन और जर्जर केंद्रों का संचालन अस्थायी व्यवस्थाओं में किया जा रहा है—
39 केंद्र किराए के मकानों में
33 सामुदायिक भवनों में
13 स्कूल परिसरों में
7 पंचायत भवनों में
9 अन्य शासकीय भवनों में
इन जगहों पर न तो बच्चों के लिए पर्याप्त जगह है, न ही सुरक्षित वातावरण। कई केंद्रों में शौचालय, पेयजल, खेल सामग्री और पोषण आहार रखने तक की उचित व्यवस्था नहीं है।

नौनिहालों के भविष्य से समझौता

विशेषज्ञों के अनुसार 3 से 6 वर्ष के बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए सुरक्षित और संसाधनयुक्त वातावरण बेहद जरूरी होता है। लेकिन कोटा में कई बच्चे तंग कमरों, जर्जर दीवारों और अस्थायी ढांचों में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है—छत टपकना, कीचड़ और असुरक्षित माहौल बच्चों की उपस्थिति पर सीधा असर डालता है।
59 नए भवनों को मिली स्वीकृति, लेकिन सवाल बाकी
सरकार ने 59 भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए नए भवन निर्माण की स्वीकृति दी है। हालांकि, अब भी दर्जनों केंद्र ऐसे हैं जिनके लिए कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वीकृति के बाद भी निर्माण कार्य में देरी आम बात है, जिससे बच्चों को लंबे समय तक असुविधा झेलनी पड़ती है।

आईटीआई की मांग भी उठी

इसी दौरान विधायक अटल श्रीवास्तव ने तकनीकी शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान तेंदुवा क्षेत्र में नए आईटीआई कॉलेज की स्थापना की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा के लिए दूर जाना पड़ता है।
जमीनी हकीकत बनाम सरकारी दावे

एक तरफ सरकार पोषण अभियान और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर कोटा के आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
जब नन्हें बच्चों को सुरक्षित छत तक नसीब नहीं हो रही, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण की उम्मीद करना भी मुश्किल नजर आता है।

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