टीपीओ नियुक्ति में फर्जीवाड़े का आरोप, वसूली और जांच की मांग
विश्वविद्यालय में करोड़ों के भुगतान पर विवाद, NSUI ने दी आंदोलन की चेतावनी
बिलासपुर ।विश्वविद्यालय में टीपीओ नियुक्ति को लेकर बड़े फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक शैक्षणिक पद को नियमों की अनदेखी कर अशैक्षणिक पद में बदल दिया गया, जबकि संबंधित पद की स्वीकृति ही नहीं थी। बिना यूजीसी या शिक्षा मंत्रालय की अनुमति के छात्रों की फीस से कथित रूप से 1 से 15 करोड़ रुपये तक का भुगतान किया गया।मामले में चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि साक्षात्कार में 30 अंकों के स्थान पर 341 अंक दिए गए और अपात्र अभ्यर्थी को चयनित किया गया। साथ ही संदिग्ध डिग्री और असंबंधित अनुभव को भी मान्यता दी गई। वर्ष 2016 में वित्तीय समिति और 2025 की जांच समिति ने भी अनियमितताओं की पुष्टि की थी, बावजूद इसके भुगतान जारी रहा।शिकायत में वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। साथ ही संबंधित अधिकारी को सभी प्रभारों से हटाने की मांग भी की गई है। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।