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नक्सलवाद के खिलाफ एबीवीपी का बिगुल बिलासपुर में निकली अनोखी शव-यात्रा….

नक्सलवाद के अंत का ऐलान, सड़कों पर उतरे युवा– शव-यात्रा से गूंजा शहर….

“नक्सलवाद मुर्दाबाद” के नारों से गूंजा शहर, एबीवीपी की अनोखी पहल….

बिलासपुर प्रदेश भर में आज जोश, उत्साह और देशभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने नक्सलवाद के खिलाफ एक साथ शव यात्राएं निकालकर एक मजबूत और साफ संदेश दिया। इसी कड़ी में बिलासपुर में भी स्वामी आत्मानंद कॉलेज से अमर जवान सीएमडी चौक तक एक शानदार और प्रभावशाली यात्रा निकाली गई, जिसने पूरे शहर के माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।

दरअसल बिलासपुर की सड़कों पर आज कुछ अलग ही माहौल नजर आया। हाथों में तख्तियां, जुबां पर जोशीले नारे और दिलों में देश के प्रति समर्पण लिए एबीवीपी के कार्यकर्ता नक्सलवाद के खिलाफ एकजुट होकर सड़कों पर उतरे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नक्सलवाद के प्रतीक के रूप में एक अनोखी शव-यात्रा निकाली, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और चर्चा का विषय बन गई।इस शव-यात्रा का मुख्य उद्देश्य था देश में नक्सलवाद के अंत का संदेश देना और समाज में शांति, सुरक्षा और विकास की नई सोच को मजबूत करना। यात्रा के दौरान “नक्सलवाद मुर्दाबाद” और “भारत माता की जय” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा, जिससे हर तरफ जोश और ऊर्जा का संचार होता दिखा।आपको बता दें कि भारत सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था, और तय समय सीमा के अनुसार अब सशस्त्र नक्सलवाद के अंत की बात सामने आ रही है। इस बड़ी उपलब्धि को लेकर युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।इसी उत्साह के साथ एबीवीपी के कार्यकर्ता एकत्रित हुए और नक्सलवाद के अंत को एक युग की समाप्ति के रूप में प्रस्तुत करते हुए यह प्रतीकात्मक शव-यात्रा निकाली। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए और इस पहल की सराहना की। उन्होनें कहा कि यह हमारे देश के लिए गर्व का क्षण है। अब वे क्षेत्र, जो वर्षों से नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां शांति और विकास का नया दौर शुरू होगा। आम नागरिक अब निडर होकर जीवन जी सकेंगे। एबीवीपी का यह आयोजन सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है.एक ऐसे भारत का, जो सुरक्षित हो, शांतिपूर्ण हो और तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा हो।

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