सड़क हादसे के पीड़ितों के हक में अहम फैसला, आवेदन में देरी के आधार पर खारिज नहीं होंगे मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण,9 कंपनियों की याचिकाएं खारिज
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा के मामलों में पीड़ित परिवारों के हक में एक अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच कोर्ट ने आदेश दिया है कि केवल देरी से आवेदन करने के आधार पर क्लेम के मामलों को शुरुआती स्तर पर खारिज नहीं किया जाएगा। इस फैसले से प्रदेश के उन सैकड़ों परिवारों को न्याय की उम्मीद मिली है, जो किसी कारणवश निर्धारित समय के भीतर कोर्ट नहीं पहुंच पाए थे।
श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, चोलामंडलम एमएस. जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी, बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ,टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, इफको टोक्यो नरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और वाहन मालिकों ने 40 से अधिक सिविल रिवीजन याचिकाएं लगाई थीं, इसमें तर्क दिया था कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166(3) के तहत समय सीमा बीत जाने के बाद क्लेम के आवेदनों की सुनवाई का अधिकार ट्रिब्यूनल के पास नहीं है। लेकिन हाई कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि पीड़ितों को केवल समय सीमा जैसी तकनीकी वजहों से न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। हालांकि बीमा कंपनी और आवेदकों को यह छूट रहेगी कि सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले को ट्रिब्यूनल के सामने रख सकें।
ट्रिब्यूनल में जारी रहेगी सुनवाई:–
सभी संबंधित मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल्स को निर्देश दिया गया है कि वे इन याचिकाओं पर कानून के अनुसार सुनवाई जारी रखें। चूंकि यह कानूनी मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक वहां से अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक ट्रिब्यूनल कोई अंतिम आदेश यानी फाइनल अवार्ड पारित नहीं करेंगे।
आदेश का क्या होगा असर:–
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब बीमा कंपनियां पीड़ितों के आवेदन को समय सीमा का हवाला देकर रद्द नहीं करवा पाएंगी। मामले की मेरिट पर सुनवाई चलती रहेगी। यानी ट्रिब्यूनल हादसे की सच्चाई और नुकसान के आधार पर मामलों की सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट से समय सीमा के मामले पर अंतिम निर्णय जारी होने के बाद सभी मामलों में मुआवजे की राशि का भुगतान किया जा सकेगा।