तालाब सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों का केंद्र होता है – डॉ सोमनाथ यादव

तालाबों बचाने सांकेतिक जलसत्याग्रह किया गया
बिलासपुर। तालाब सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों का केंद्र होता है उसे संरक्षित करना हम सब का दायित्व है। उक्त उदगार अरपा बचाओ अभियान के संयोजक डॉ सोमनाथ यादव (संस्थापक, बिलासा कला मंच बिलासपुर) ने तालाबों के संरक्षण हेतु ऐतिहासिक तालाबों की नगरी कहे जाने वाले रतनपुर में आयोजित विचार गोष्ठी में अध्यक्षता करते हुए व्यक्त की।
डॉ सोमनाथ यादव ने कहा कि तालाब केवल जल का स्रोत ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत का प्रतीक हैं। प्राचीन समय में इन्हें समाज की साझी संपत्ति और पवित्र माना जाता था, जो न केवल इंसानों की प्यास बुझाते थे, बल्कि भूजल को रिचार्ज करने और जैव विविधता को बनाए रखने में भी मदद करते थे। तालाब गाँव के लोगों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों का केंद्र होते थे। डॉ सोमनाथ यादव ने कहा कि तालाबों की नगरी रतनपुर में तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में अत्यंत वैज्ञानिक और उन्नत इंजीनियरिंग तकनीक से किया गया था। कल्चुरी राजवंश (लगभग 1044-1854 ई.) के शासकों ने जल प्रबंधन को अपना ‘राजधर्म’ माना और नगर के चारों ओर तालाबों का एक ऐसा जाल बिछाया जो आज के आधुनिक इंजीनियरों को भी चकित करता है। रतनपुर में ऐतिहासिक और पौराणिक तालाब है तो साथ ही रामसर में भी उल्लेख है। डॉ सोमनाथ ने कहा कि तालाबों का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल और पर्यावरण सुरक्षित रह सके।
बाबू रेवाराम गुप्त सृजनपीठ रतनपुर द्वारा तालाब बचाओ, पानी बचाओ की मुहिम लगातार चलाया जा रहा है। उसी तारतम्य में यह विचार गोष्ठी रतनपुर में रखी गई थी। इस अवसर पर सृजनपीठ के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि रतनपुर के अधिकांश तालाबों में बेजाकब्जा हो गया है, सौंदरीकरण के नाम पर कांक्रीटीकरण करके तालाबों को बर्बाद किया जा रहा है। वही नगर पालिका रतनपुर द्वारा मछलीपालन के नाम पर तालाबों को ठेका दी जाती है जिसके कारण तालाबों की नैसर्गिक स्थिति खराब हो गई है। विचार गोष्ठी का संचालन करते हुए सृजनपीठ के सचिव बृजेश श्रीवास्तव ने कहा कि तालाबों के पार में पेड़ लगाना और तालाबों को साफ रखना हम सब का दायित्व बनता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि तालाबों के पार में बने मठ,मंदिरों का संरक्षण हो, घर का गंदा पानी डालना बंद है, जलकुंभी को हटाया जाए और बीकमा तालाब, आठबीसा तालाब, बेद तालाब, रत्नेश्वर तालाब तथा वैराग्यवन तालाब जो कि ऐतिहासिक भी है उसका संरक्षण हो।
विचार गोष्ठी में उपस्थित वक्ता बिलासा कला मंच के अध्यक्ष महेश श्रीवास, डा सुधाकर बिबे,राजेंद्र मौर्य,रामेश्वर गुप्ता,अनूप श्रीवास, सतीश पाण्डेय, एम डी मानिकपुरी,रतनपुर के साहित्यकार दिनेश पांडेय, रामानंद यादव, मुकेश श्रीवास्तव ने रतनपुर के तालाबों में हुए बेजाकब्जा, मछलीपालन, कांक्रीटीकरण पर दुख जताया वही राजनीतिक नेताओं की उदासीनता पर खेद व्यक्त करते हुए स्थानीय और जिला प्रशासन के लापरवाही और अड़ियल रवैए की निंदा की गई।
विचार गोष्ठी के बाद उपस्थित साहित्यकारों, गणमान्य नागरिकों ने रतनपुर के प्रसिद्ध तालाब कृष्ण अर्जुनी में जाकर सांकेतिक जलसत्याग्रह कर तालाब के किनारों की साफ सफाई की एवं पौराणिक सूर्येश्वर महादेव मंदिर मे पूजा अर्चना कर जवाबदार जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों को सद्बुद्धि मिले जिससे सभी तालाब अपने पुराने वैभव में वापस आ जाए यही प्रार्थना की गई।