ईडी-आरपीजेडओ ने भारतमाला जांच का दायरा बढ़ाया, छत्तीसगढ़ में कई ठिकानों पर छापेमारी

👉 मुआवजा घोटाले की कड़ियां जिलों तक फैलीं, अनियमितताएं 500 करोड़ रुपये के पार
👉 भूपेंद्र चंद्राकर, रोशन चंद्राकर और गोपाल गांधी के परिसरों पर सर्च कार्रवाई
👉 एसीबी ईओडब्ल्यू की एफआईआर, गिरफ्तारी, चार्जशीट और पीएमएलए के तहत संपत्ति कुर्की से जुड़ा मामला

रायपुर, ।भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर जोनल कार्यालय ईडी आरपीजेडओ ने सोमवार को अपनी जांच का दायरा और विस्तृत कर दिया। केंद्रीय एजेंसी ने धमतरी जिले के कुरूद और रायपुर के अभनपुर समेत छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर समन्वित सर्च एवं सीजर अभियान चलाया। यह कार्रवाई रायपुर विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत भूमि मुआवजे में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच में एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है।

कुरूद में ईडी की टीम तड़के सरोजिनी चौक के समीप भूपेंद्र चंद्राकर के निवास पर पहुंची और कड़ी सुरक्षा के बीच तलाशी की कार्रवाई शुरू की। परिसर की घेराबंदी के लिए सीआरपीएफ जवानों को तैनात किया गया, जिससे आवागमन सीमित कर दिया गया। अधिकारियों ने दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की। भूपेंद्र चंद्राकर को पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर का रिश्तेदार बताया जाता है, जिससे यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। समानांतर रूप से रोशन चंद्राकर, जो राइस मिल एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष रहे हैं, से जुड़े परिसरों पर भी सुबह से जांच जारी रही।

इसी क्रम में अभनपुर में ईडी की टीम ने भूमि कारोबारी गोपाल गांधी के निवास और कार्यालय पर भी छापेमारी की। लगभग 13 अधिकारियों की टीम ने यह कार्रवाई की, जहां प्रारंभिक स्तर पर कुछ विरोध की स्थिति सामने आई, किंतु विधिसम्मत प्रक्रिया के बाद प्रवेश सुनिश्चित किया गया। जांचकर्ता संपत्ति संबंधी अभिलेखों, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कथित धन के डायवर्जन और लेयरिंग की कड़ियों को खंगाल रहे हैं।

केंद्रीय एजेंसियों और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो एसीबी ईओडब्ल्यू से प्राप्त इनपुट के अनुसार यह मामला मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें अपात्र व्यक्तियों, रिश्तेदारों और सहयोगियों को कथित रूप से अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। प्रारंभिक आकलन में अनियमितताओं की राशि 500 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है, जिसके तार दुर्ग, पाटन, राजनांदगांव और मगरलोड तक जुड़े होने की जांच की जा रही है।
वर्तमान कार्रवाई एक विस्तृत जांच श्रृंखला का हिस्सा है। 16 मार्च 2025 को ईडी ने कथित अपराध से अर्जित 23.35 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की थी, जबकि कुल गबन राशि 27.05 करोड़ रुपये आंकी गई थी। यह मामला एसीबी ईओडब्ल्यू द्वारा हरमीत सिंह खनूजा समेत अन्य आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर से प्रारंभ हुआ, जिसके पश्चात विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
इससे पूर्व 11 फरवरी 2026 को एसीबी ईओडब्ल्यू ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद दो फरार राजस्व अधिकारियों तत्कालीन अभनपुर तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और गोबरा नवापारा के नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को गिरफ्तार किया था। जांच में आरोप है कि फर्जी राजस्व अभिलेखों और बैकडेटेड प्रविष्टियों के माध्यम से मुआवजे की राशि बढ़ाकर राज्य को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
इसके अतिरिक्त 24 जनवरी 2026 को दाखिल पूरक चालान में तीन पटवारियों दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे के नाम सामने आए, जिन पर भूमि अभिलेखों में हेरफेर कर मुआवजा वितरण में अनियमितता करने का आरोप है, जिससे लगभग 40 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे मामले में जमीन के टुकड़ों का अधिसूचना के बाद फर्जी विभाजन, जाली दस्तावेजों का उपयोग तथा मुआवजे की राशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से घुमाकर गबन करने जैसी कार्यप्रणाली अपनाई गई। अधिकारियों का कहना है कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।