कीटनाशक घटा रहे पतंगे और भंवरे…

– संकट में मधुमक्खी और तितलियां
बिलासपुर- संकट में हैं मधुमक्खियां। घट रही आबादी तितलियों की। कम ही नजर आ रहे हैं पतंगे और भंवरे। असर पौष्टिक भोजन की कमजोर उपलब्धता के रूप में नजर आएगा, तो खाद्य सामग्रियों में सूक्ष्म पोषक तत्व भी कम होंगे।

75 फ़ीसदी खाद्य फसलें जैविक परागण पर निर्भर हैं लेकिन अस्तित्व संकट के दौर से गुजर रहे हैं प्रमुख परागणक कीट। इस खुलासे के बाद वानिकी एवं कीट वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे व्यावहारिक उपाय सुझाए हैं, जिन पर अमल से परागणक कीटों की घटती आबादी पर न केवल रोक लगेगी बल्कि खाद्य सामग्री में पोषक तत्व भी बने रहेंगे।
इसलिए घट रहे परागणक
प्रमुख परागण कीटों की घटती संख्या के पीछे सबसे बड़ी वजह कीटनाशकों का बेतहाशा छिड़काव और प्राकृतिक आवास के विनाश को माना जा रहा है। इसके अलावा ऐसी झाड़ियां और ऐसी घास भूमियों का कम होना दूसरी वजह मानी जा रही हैं, जिसमें यह कीट रहते हैं। जलवायु परिवर्तन के बीच वायु प्रदूषण भी परागण कीटों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सर्वाधिक नुकसान उस मधुमक्खी को हो रहा है, जिसे सबसे ज्यादा परागण करने वाला कीट माना जाता है।
क्या है परागण
परागण वह प्रक्रिया है जिसमें फूलों के पुंकेसर से पराग कण मादा भाग तक पहुंचते हैं। यह प्रक्रिया फल और बीज बनाने की राह आसान करती है। अधिकतर खाद्य फसलें परागण पर ही निर्भर हैं। इनमें आम, अमरूद, सेब, सूरजमुखी, सरसों, टमाटर, बैंगन, मिर्च और कद्दू वर्गीय फसलें मुख्य हैं। इसके साथ दलहन- तिलहन की कुछ विशेष प्रजातियों के साथ महुआ, करंज और सहजन जैसे वन उपज भी परागण करने वाली कीटों की मदद से आकार लेते हैं।
सुझाए यह उपाय
नीम, करंज, सहजन, जामुन, बांस, महुआ और खैर। वृक्षों की यह प्रजातियां प्रमुख परागण करने वाले कीटों का प्राकृतिक आवास हैं। इन्हें बचाना होगा अवैध कटाई से। ऐसी झाड़ियां और ऐसी घास भूमियों के विस्तार के प्रयास करने होंगे, जिनमें यह रहना पसंद करतें हैं। मेड़ों पर फूल वाले पौधों का रोपण आवश्यक होगा। फौरन रोकना होगा कीटनाशकों का बेतहाशा छिड़काव क्योंकि इसे ही सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है परागणकों की घटती आबादी के लिए।
वर्जन
खाद्य सुरक्षा के मौन प्रहरी
मधुमक्खियां, तितलियां और भंवरे हमारी खाद्य सुरक्षा के मौन प्रहरी हैं। लगभग 75 प्रतिशत खाद्य फसलें परागण पर निर्भर हैं। नीम, करंज, महुआ, सहजन, जामुन, बांस और खैर जैसे वृक्ष इन परागणकों को आश्रय और भोजन प्रदान करते हैं। कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग पर रोक, प्राकृतिक आवासों का संरक्षण और खेतों की मेड़ों पर फूलदार पौधों का रोपण कर हम परागणक कीटों को बचाते हुए पौष्टिक भोजन और टिकाऊ कृषि व्यवस्था सुनिश्चित कर सकते हैं।
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर