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“अघोरान्ना परो मंत्र…” के जयघोष से गूंजा बिलासपुर, अखंड परिक्रमा और भजन में लीन रहे श्रद्धालु

बिलासपुर | अघोरपीठ श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान में पूज्य गुरुदेव अवधूत अघोरेश्वर भगवान राम विभूति स्थल, चरण पादुका एवं शिवलिंग स्थापना दिवस पर्व परमपूज्य गुरुदेव पुज्यपाद गुरुपद संभवराम बाब जी के निर्देशन में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। दो दिवसीय इस भव्य धार्मिक आयोजन में छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु गुरु भक्ति में लीन होकर अखंड परिक्रमा, भजन, महामंत्र जाप एवं आरती में शामिल हुए। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, सेवा, अनुशासन और सद्भावना का दिव्य वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ शाखा के मंत्री उमेश नारायण मिश्रा के द्वारा अघोर परंपरा के अनुसार विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इस अवसर पर बाबा अवधूत भगवान राम की विशेष पूजा संपन्न हुई।

अघोरेश्वर भगवान राम विभूति स्थल पर “अघोरान्ना परो मंत्र नास्तित्वं गुरु: परम” महामंत्र के गूंजते स्वर के बीच 24 घंटे तक अखंड परिक्रमा एवं महामंत्र जाप चलता रहा। भक्ति संगीत, ढोल-मंजीरों और गुरु स्मरण के बीच श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा से आध्यात्मिक साधना में तल्लीन दिखाई दिए।

आयोजन में माताओं, बहनों, युवाओं एवं बच्चों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने गुरु परंपरा के प्रति उनकी अटूट आस्था एवं आश्रम परिवार की एकजुटता को और अधिक मजबूत किया। कार्यक्रम का समापन प्रातःकालीन भव्य आरती, गुरु स्तुति एवं भजनों की अमृतधारा के साथ हुआ, जिसके पश्चात उमेश नारायण मिश्रा जी के द्वारा पावन ग्रंथ सफलयोनि का श्रद्धापूर्ण पाठ किया गया, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

गुरु ज्ञान, निष्ठा एवं आत्मिक विकास पर हुई आध्यात्मिक गोष्ठी

कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई, जिसे धर्मेन्द्र श्रीवास, सिमरन, प्रितम एवं अनुराग द्वारा श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ प्रस्तुत किया गया। उनके मधुर एवं आध्यात्मिक प्रस्तुतीकरण ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और उपस्थित श्रद्धालु गुरु स्मरण एवं भक्ति रस में भावविभोर हो उठे।

पारिवारिक आध्यात्मिक गोष्ठी में गुरु ज्ञान, निष्ठा एवं आत्मिक विकास जैसे विषयों पर वक्ताओं ने अपने प्रेरणादायी विचार साझा किए।

गोष्ठी का प्रभावशाली मंच संचालन अभय पांडेय (वन विभाग) ने किया। इस दौरान जितेन्द्र सिंह चौहान, संजय सराफ, हिमांशु तिवारी, श्याम सिंहदेव (वन विभाग) एवं अभिजीत तिवारी सहित शिष्यों ने गुरु वचनों, आध्यात्मिक साधना तथा जीवन में गुरु के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

वक्ताओं ने कहा कि गुरु के उपदेश केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे व्यक्ति को श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति के भीतर विद्यमान हैं और सच्ची श्रद्धा, सेवा एवं निष्ठा के माध्यम से ही गुरु कृपा प्राप्त की जा सकती है। गोष्ठी में यह भी कहा गया कि जिज्ञासा व्यक्ति को ज्ञान की ओर ले जाती है, ज्ञान से निष्ठा उत्पन्न होती है और निष्ठा ही गुरुदेव तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्त करती है।

आत्माराम बाबा ने दिया सेवा, समर्पण और संस्कारों का संदेश

पूज्य आत्माराम बाबा ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करते हुए गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा, सेवा और समर्पण का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि आश्रम में किया गया प्रत्येक कार्य, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। यहां तक कि सफाई जैसी साधारण सेवा भी यदि श्रद्धा एवं समर्पण के साथ की जाए, तो व्यक्ति को सेवा भाव का वास्तविक अनुभव होने लगता है।

उन्होंने कहा कि प्रचंड गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति उनकी अटूट आस्था एवं गुरु के प्रति असीम विश्वास को दर्शाती है। श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से आशीर्वचन एवं गोष्ठी को सुना, जो उनके आध्यात्मिक जुड़ाव का परिचायक रहा।

आत्माराम बाबा ने शिक्षा और दीक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वास्तविक शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होती, बल्कि अच्छे संस्कार, सत्कर्म, विनम्र व्यवहार एवं दूसरों के प्रति सद्भाव रखना ही सच्ची शिक्षा है। आश्रम व्यक्ति को इन्हीं मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है, जिससे समाज में प्रेम, सेवा, सद्भभावना और सकारात्मकता का वातावरण निर्मित होता है।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर राकेश दीक्षित जी द्वारा सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों एवं आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले सेवादारों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने आयोजन की सफलता में सभी के योगदान की सराहना करते हुए गुरु परंपरा के प्रति इसी प्रकार श्रद्धा, सेवा एवं समर्पण बनाए रखने को कहा। आयोजन को सफल बनाने में विभिन्न शाखाओं से पहुंचे सेवादारों का विशेष योगदान रहा। इसमें जगदलपुर, राजनांदगांव, भाठापारा, मुंगेली, वाड्रफनगर, अंबिकापुर, बगीचा, बतौली, रायगढ़, बालको एवं बिलासपुर शाखा के समस्त युवा मंडल एवं महिला मंडल के सदस्यों ने सेवा, व्यवस्था एवं धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाई। वहीं ग्राम सेमरचुआं की माँ महामाया कीर्तन मंडली के मधुर वाणियों से “अघोरान्ना परो मंत्र नास्तित्वं गुरु: परम” की कीर्तन ने पूरे आयोजन को भक्तिमय बना दिया और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भावविभोर कर दिया।

पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी एवं विशाल भंडारे की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। भंडारे में सेवा दे रहे सेवादारों की समर्पित भावना और अनुशासित व्यवस्था ने सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। दिनभर चले इस आयोजन में भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालु गुरु भक्ति में लीन होकर आश्रम की आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ते रहे और आत्मिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते नजर आए। श्रद्धा, सेवा, समर्पण और गुरु भक्ति से ओतप्रोत यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया।

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