सीएमडी कॉलेज बिलासपुर में प्रवेश शुल्क मे घोटाले का सीधा आरोप….कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष पर गंभीर आरोप,खबर प्रकाशित होते ही रातों-रात बनाई गई रसीद

कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. एस. पावनी पर गंभीर आरोप, खबर प्रकाशित होते ही रातों-रात बनाई गई रसीद
बिलासपुर।
सी.एम.डी. दुबे स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर में प्रवेश शुल्क से जुड़े गंभीर मामले ने अब पूरे महाविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बी.ए. चौथे सेमेस्टर के छात्र गणेश राम ने कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. एस. पावनी पर आरोप लगाया है कि उनसे लगभग ₹12,000 प्रवेश शुल्क लेने के बावजूद महीनों तक आधिकारिक रसीद नहीं दी गई।
पीड़ित छात्र के अनुसार वह पिछले छह माह से लगातार कॉलेज कार्यालय और विभाग के चक्कर काटता रहा, लेकिन हर बार उसे टाल दिया गया। कभी बाद में आने को कहा गया तो कभी अन्य कर्मचारियों के पास भेज दिया गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाला छात्र हर सुबह अखबार बाँट कर अपनी पढ़ाई का खर्च उठाता है, लेकिन उसकी समस्या को लगातार नजरअंदाज किया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब मामला सार्वजनिक हुआ और समाचार माध्यमों में प्रकाशित हुआ, तब अचानक रातों-रात छात्र की रसीद तैयार कर दी गई। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि पूरे मामले को दबाने तथा कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. एस. पावनी को बचाने का प्रयास
किया जा रहा है।

यदि छात्र द्वारा प्रवेश शुल्क की राशि समय पर जमा कर दी गई थी, तो उसे महीनों तक आधिकारिक रसीद से वंचित क्यों रखा गया? सबसे गंभीर बात यह है कि यदि मामला सार्वजनिक नहीं होता, तो संबंधित छात्र भविष्य में परीक्षा, अंकसूची एवं अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में गंभीर समस्याओं का सामना कर सकता था।
छात्रों का आरोप है कि कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. एस. पावनी द्वारा राशि लेने के बाद उसे आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया, जिससे छात्र का भविष्य संकट में पड़ सकता था। मामला उजागर होने और समाचार प्रकाशित होने के बाद अचानक रातों-रात रसीद तैयार किया जाना पूरे प्रकरण को और अधिक संदिग्ध बनाता है।
छात्रों एवं अभिभावकों के बीच इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि विभागाध्यक्ष स्तर के अधिकारी ही इस प्रकार की अनियमितताओं में संलिप्त पाए जाते हैं और बाद में आंतरिक गुटबाजी के जरिए उन्हें बचाने का प्रयास किया जाता है, तो यह पूरे महाविद्यालय की विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
20 मई 2026 को आज़ाद पैनल के सदस्य हरीश कलशा एवं नमन रात्रे पीड़ित छात्र को लेकर प्राचार्य संजय सिंह से मिले और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। प्राचार्य द्वारा जांच का आश्वासन दिया गया है, लेकिन अब छात्र केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस और सार्वजनिक कार्रवाई चाहते हैं।
छात्र संगठनों एवं अभिभावकों ने मांग की है कि कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. एस. पावनी की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए तथा यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी शिक्षक या अधिकारी छात्र हितों के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।