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एक हाथ से दिया, दूसरे हाथ से छीना 1000 रुपए का ढिंढोरा पीट रही साय सरकार ने बुजुर्गों का निवाला छीना

6 महीने से वृद्धापेंशन बंद , महतारी वंदन की चमक में सरकार ने बुजुर्गों को भुला दिया

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना की चमचमाती हेडलाइंस लाइंस और सरकारी विज्ञापनों के पीछे एक ऐसा कड़वा सच छिप गया है, जिसने प्रदेश के लाखों सयानों (बुजुर्गों) के आंसुओं को बेमोल कर दिया है। प्रदेश की भाजपा सरकार जहां हर महीने एक हजार रुपए बांटकर महिला सशक्तिकरण का महा-उत्सव मना रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के असहाय, विधवा और दिव्यांग बुजुर्ग बीते छह महीनों से पाई-पाई को मोहताज हैं। सरकार ने लोक लुभावन दावों की आड़ में चुपचाप वृद्धावस्था पेंशन पर अघोषित लॉकडाउन लगा दिया है। इस गंभीर मुद्दे पर पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने इसे बुजुर्गों का घोर अपमान बताते हुए कहा कि महतारी वंदन के प्रचार प्रसार में छत्तीसगढ़ के बुजुर्ग और सियानों को साय सरकार ने भुला दिया है।

श्री पाण्डेय ने कहा कि भाजपा सरकार केवल इवेंट मैनेजमेंट की सरकार बनकर रह गई है।यह कैसी संवेदनशीलता है जहां एक घर में बहू को 1000 देने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, और उसी घर के दादा-दादी की 350 और 500 की पेंशन पिछले 6 महीने से रोक कर रखी गई है क्या सरकार के पास बुजुर्गों को देने के लिए पैसे नहीं हैं, या फिर सारा बजट सिर्फ अपनी ब्रांडिंग और वाहवाही लूटने वाले विज्ञापनों में फूंक दिया गया है?

दवा और दाने-दाने को तरस रहे हैं बुजुर्ग
श्री पाण्डेय ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए सरकार से सीधे तीन ज्वलंत और तीखे सवाल किए हैं

दवाइयों का संकट- गांवों और कस्बों में रहने वाले गरीब बुजुर्ग इस मामूली पेंशन राशि से अपनी बीपी, शुगर और दमे की दवाइयां खरीदते थे। 6 महीने से फूटी कौड़ी न मिलने के कारण कई बुजुर्ग बिना इलाज के खाट पर पड़े हैं।
बैंकों के चक्कर काटती बूढ़ी आंखे ,बारिश , धूप और उमस भरे मौसम में 70-80 साल के बुजुर्ग हर हफ्ते लाठी टेकते चॉइस सेंटरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें हर बार लिंक फेल या बजट नहीं है कहकर उल्टे पांव लौटा दिया जाता है।

अधिकारियों की चुप्पी जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि आखिर यह राशि कब आएगी। प्रशासनिक अमला पूरी तरह से पंगु हो चुका है।

बजट की हेराफेरी या राजनीतिक छलावा
पूर्व विधायक श्री पाण्डेय ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिति को खोखला कर दिया है। अपनी चुनावी घोषणा (महतारी वंदन) को पूरा करने के लिए सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के बजट को डाइवर्ट कर दिया है। यह नीतिगत दिवालियापन नहीं तो और क्या है, जहां समाज के सबसे कमजोर और आखिरी कतार के व्यक्ति का हक मारकर अपनी पीठ थपथपाई जा रही है?

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