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वर्षा के बीच धान की खेती के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह….

बिलासपुर/जिले में पिछले दो दिनों से हो रही अच्छी वर्षा तथा आगामी 8 जुलाई तक वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक गीत शर्मा ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। किसानों से अपील की गई है कि वे वर्षा जल का अधिकतम उपयोग करते हुए खेतों की मेड़बंदी करें और वर्षा जल का संचयन सुनिश्चित करें। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जिन किसानों की धान नर्सरी 15 से 21 दिन की हो चुकी है, वे वर्षा के पानी को खेत में रोककर खेत की मटाई करें तथा तत्काल धान की रोपाई प्रारंभ करें। वहीं जिन किसानों की नर्सरी 12 से 15 दिन की है, उन्हें श्री विधि से धान की रोपाई करने की सलाह दी गई है। जिन किसानों ने अभी तक थरहा तैयार नहीं किया है और जिनके पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे लेही पद्धति अपनाते हुए खेत की मटाई कर अंकुरित धान का छिड़काव करें अथवा ड्रम सीडर की सहायता से कतारों में बुआई करें। जिन किसानों ने धान की कतार बोनी पहले ही कर ली है, वे जलभराव की स्थिति बनने पर अतिरिक्त पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था करें। धान के अलावा अन्य खरीफ फसलों में भी जल निकासी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक शर्मा ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि रोपा, ब्यासी अथवा लेही पद्धति से बुआई के सात दिन बाद 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से नील-हरित काई का प्रयोग करें तथा खेत में 2 से 3 इंच तक पानी का स्तर बनाए रखें। इससे मृदा में लगभग 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नत्रजन का स्थिरीकरण होगा, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और फसल की बेहतर वृद्धि में सहायता मिलेगी।

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