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किसान पुत्र कुलदीप पटेल को राष्ट्रपति भवन से मिली राष्ट्रीय पहचान

‘फसल बाजार’ के माध्यम से एक लाख से अधिक किसानों को सीधा बाजार, श्री अन्न की वैल्यू चेन को मिली नई दिशा

बिलासपुर। किसानों को बिचौलियों की निर्भरता से मुक्त कर उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना भारतीय कृषि व्यवस्था की प्रमुख चुनौतियों में रहा है। छत्तीसगढ़ के युवा एग्रीप्रेन्योर और ‘फसल बाजार’ के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ श्री कुलदीप पटेल ने इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए खेती से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन तक को एकीकृत करने वाला ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसने हजारों किसानों को बाजार से सीधे जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है।

उनकी इस कृषि-उद्यमिता को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित ‘एट होम रिसेप्शन’ समारोह में सम्मिलित होने के लिए भारत के राष्ट्रपति की ओर से आमंत्रित किया गया है। छत्तीसगढ़ के एक किसान परिवार से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की यह यात्रा प्रदेश के ग्रामीण युवाओं और कृषि उद्यमिता के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।

किसान परिवार से एग्रीप्रेन्योर बनने तक का सफर

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम परसाडीह निवासी कुलदीप पटेल ने बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर से बीएससी (कृषि) तथा कृषि महाविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर से एमएससी (एग्रोनॉमी) की शिक्षा प्राप्त की।

किसान परिवार से जुड़े होने के कारण उन्होंने बचपन से ही कृषि की वास्तविक चुनौतियों को करीब से देखा। किसानों को उपज का उचित मूल्य न मिलना, बाजार तक सीधी पहुंच का अभाव और बिचौलियों पर निर्भरता जैसी समस्याओं ने उन्हें कृषि क्षेत्र में कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया।

इसी सोच के साथ वर्ष 2018 में ‘फसल बाजार’ की स्थापना की गई। उद्देश्य था—किसान की उपज को खेत से सीधे उपभोक्ता और संस्थागत खरीदार तक पहुंचाना तथा उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन में किसानों की भागीदारी बढ़ाना।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से कृषि-व्यवसाय नेटवर्क तक

समय के साथ ‘फसल बाजार’ केवल एक डिजिटल एग्रीटेक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहा। यह किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को जोड़ने वाला कृषि-व्यवसाय नेटवर्क बन गया है।

संस्था द्वारा किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

एक लाख से अधिक किसानों को बाजार से जोड़ने का दावा

‘फसल बाजार’ के माध्यम से किसान अपने अनाज, फल, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कर सीधे ग्राहकों एवं खरीदारों तक पहुंचाने की व्यवस्था से जुड़ते हैं।

संस्था के अनुसार, एक लाख से अधिक किसान प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। इसके अलावा 30 से अधिक किसान उत्पादक संगठन और 50 से अधिक किसान सेवा केंद्र तकनीकी सलाह, संग्रहण, प्राथमिक प्रसंस्करण, विपणन और बाजार संपर्क जैसी गतिविधियों में सहयोग कर रहे हैं।

इस मॉडल का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि किसान को केवल उत्पादनकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि मूल्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों में भागीदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

श्री अन्न की वैल्यू चेन को मिली नई दिशा

‘फसल बाजार’ ने श्री अन्न यानी मिलेट्स को उत्पादन से बाजार तक पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया है। कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार और बाजरा जैसे पारंपरिक अनाजों की वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

श्री अन्न को केवल कच्चे कृषि उत्पाद के रूप में बेचने के बजाय उससे मिलेट आटा, कुकीज, चिवड़ा, लड्डू, चिक्की, रेडी-टू-कुक प्रीमिक्स सहित विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की पहल की जा रही है। इससे कृषि उपज का मूल्य बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसंस्करण आधारित रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

महिला स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार के अवसर

कृषि मूल्य संवर्धन का एक महत्वपूर्ण पक्ष ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी भी है। ‘फसल बाजार’ से जुड़े महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन गतिविधियों में भागीदारी की जा रही है।

इन समूहों के उत्पादों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

राष्ट्रपति भवन का आमंत्रण—छत्तीसगढ़ के लिए गौरव

कुलदीप पटेल की उपलब्धि को सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहचान राष्ट्रपति भवन से मिले आमंत्रण के रूप में मिली है। 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम रिसेप्शन’ में उनकी सहभागिता कृषि, ग्रामीण उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में उनके कार्य की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान को दर्शाती है।

यह उपलब्धि केवल एक युवा एग्रीप्रेन्योर की व्यक्तिगत सफलता के रूप में नहीं देखी जा रही, बल्कि इसे छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र, ग्रामीण युवाओं और किसान-आधारित उद्यमिता के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

पिता की खेती से मिली प्रेरणा

कुलदीप पटेल अपनी सफलता का आधार अपने किसान परिवार को मानते हैं। उनके पिता श्री राम कुमार पटेल ग्राम परसाडीह में खेती करते हैं। सीमित संसाधनों में खेती करते हुए उन्होंने अपने परिवार को मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का महत्व सिखाया।

कुलदीप पटेल अपनी यात्रा में माता-पिता और परिवार के साथ विशेष रूप से अपने चाचा श्री चंद्रप्रताप पटेल के मार्गदर्शन, विश्वास और प्रेरणा को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।

उनका कहना है कि किसान परिवार में जन्म लेना उनके लिए केवल पहचान नहीं, बल्कि कृषि की जमीनी समस्याओं को समझने का अवसर भी रहा। इसी अनुभव ने उन्हें किसानों के लिए बाजार आधारित समाधान विकसित करने की प्रेरणा दी।

“यह सम्मान केवल मेरा नहीं, किसानों का है”

इस उपलब्धि पर कुलदीप पटेल ने कहा—

“मैं एक छोटे किसान परिवार से हूं। मेरे पिता श्री राम कुमार पटेल ने कठिन परिस्थितियों में खेती करते हुए हमें मेहनत, ईमानदारी और संघर्ष का महत्व सिखाया। यदि परिवार का विश्वास, सहयोग और सही मार्गदर्शन साथ हो, तो किसान का बेटा भी देश के सर्वोच्च मंच तक अपनी पहचान बना सकता है। यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि फसल बाजार से जुड़े एक लाख से अधिक किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों, हमारी पूरी टीम, सहयोगी संस्थाओं और मेरे परिवार का सम्मान है।”

कृषि को तकनीक और बाजार से जोड़ने की तैयारी

भविष्य में ‘फसल बाजार’ द्वारा स्मार्ट कृषि तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि समाधान, डिजिटल कृषि सेवाओं, स्मार्ट सप्लाई चेन, मूल्य संवर्धन तथा कृषि उत्पादों के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विपणन को मजबूत करने की दिशा में कार्य करने की योजना है।

इस पहल का व्यापक उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ कृषि को अधिक तकनीक आधारित, टिकाऊ, बाजारोन्मुख और लाभकारी बनाना है। विशेष रूप से श्री अन्न को मूल्य संवर्धन और आधुनिक विपणन के माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी संभावनाएं देखी जा रही हैं।

बिलासपुर के कृषि महाविद्यालय ने दी शुभकामनाएं

कुलदीप पटेल की इस उपलब्धि पर बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के अधिष्ठाता डॉ. एन.के. चौरे सहित समस्त प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

एक किसान परिवार से निकलकर कृषि शिक्षा प्राप्त करना, किसानों की समस्या को समझना और फिर उसी समस्या के समाधान को उद्यमिता का आधार बनाना—कुलदीप पटेल की कहानी ग्रामीण भारत के उस बदलते स्वरूप की ओर संकेत करती है, जहां किसान का बेटा केवल खेती तक सीमित नहीं रहकर तकनीक, बाजार, मूल्य संवर्धन और नवाचार के माध्यम से कृषि की नई अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकता है।

राष्ट्रपति भवन तक पहुंची यह कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके केंद्र में केवल एक युवा उद्यमी नहीं, बल्कि किसान, ग्रामीण युवा, महिला स्व-सहायता समूह, एफपीओ और स्थानीय कृषि उत्पादों को बाजार से जोड़ने की एक व्यापक सोच दिखाई देती है। यदि ऐसे मॉडल निरंतर मजबूत होते हैं, तो खेत से बाजार तक की दूरी कम करने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

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