ट्रेन के बायो-टॉयलेटमें बह गई 3 लाख की सोने की अंगूठी
बिलासपुर | चलती ट्रेन के
बायो-टॉयलेट में 3 लाख की सोने की अंगूठी गिर जाए, तो किसी के भी पैरों तले जमीन खिसक जाना तय है। आमतौर पर लोग मान लेते हैं कि टॉयलेट के फ्लश में गई चीज अब कभी वापस नहीं मिलेगी, लेकिन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। रेलवे की स्पेशल मेंटेनेंस टीम ने वह काम किया, जिससे भारतीय रेल की छवि चमक गई है।
दरअसल रोंगटे खड़े कर देने वाला यह वाकया 20845 बिलासपुर-बीकानेर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के एम-1 कोच में सामने आया। ट्रेन में सफर कर रहे यात्री मुकेश पालीवाल जैसे ही टॉयलेट का इस्तेमाल करने पहुंचे, अचानक उनकी उंगली से निकलकर 3 लाख कीमत की भारी-भरकम सोने की अंगूठी सीधे बायो-टॉयलेट के कमोड में जा गिरी। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाते, अंगूठी सीधे पाइपलाइन के जरिए नीचे बायो-टैंक में समा गई।
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रेल मदद’ पर चीख-पुकार, अलर्ट मोड में आया बिलासपुर रेल मंडल
हाथ से कीमती गहना फिसलते ही यात्री के होश उड़ गए। उन्होंने बिना एक पल गंवाए तुरंत मोबाइल निकाला और ‘रेल मदद’ पोर्टल पर अपनी आपबीती दर्ज कराते हुए मदद की गुहार लगाई। ऑनलाइन शिकायत मिलते ही बिलासपुर रेल मंडल का मैकेनिकल विभाग अलर्ट मोड पर आ गया। जैसे ही बिलासपुर एक्सप्रेस स्टेशन पहुंची, संबंधित एम-1 कोच को बिना देरी किए सीधे कोचिंग डिपो में मेंटेनेंस के लिए शिफ्ट कर दिया गया।
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गंदगी के बीच चलाया गया ‘स्पेशल ऑपरेशन’
इसके बाद शुरू हुआ रेलवे का सबसे चुनौतीपूर्ण और मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन। बायो-टॉयलेट मेंटेनेंस टीम के जांबाज कर्मचारी हेमंत रजक, महेंद्र भार्गव और मनोज ने गंदे और दुर्गंधभरे माहौल के बीच मोर्चा संभाला। बेहद सावधानी के साथ बायो-टॉयलेट का मुख्य टैंक खोला गया। घंटों की कड़ी मशक्कत, धीरज और सूझबूझ का परिचय देते हुए टीम ने जब एस-ट्रैप की गहराई में हाथ डाला, तो चमचमाती सोने की अंगूठी बिना किसी नुकसान के सही-सलामत बाहर निकल आई।
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अधिकारियों की मौजूदगी में सौंपी अंगूठी
बायो-टैंक से अंगूठी सुरक्षित बरामद होते ही आरपीएफ और मैकेनिकल विभाग के आला अफसरों को मौके पर बुलाया गया। आधिकारिक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद अधिकारियों की मौजूदगी में यात्री मुकेश पालीवाल को उनकी 3 लाख की अंगूठी वापस सौंप दी गई। अपनी खोई हुई अंगूठी हाथ में पाते ही यात्री की आंखें खुशी से छलक उठीं और उन्होंने भारतीय रेलवे की तत्परता व कर्मचारियों की ईमानदारी का सहृदय आभार जताया।