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दीक्षारंभ छात्र प्रेरण कार्यक्रम के तीसरे दिन नवप्रवेशी विद्यार्थियों ने जाना फसल अनुसंधान, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व विकास एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्व

बिलासपुर। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित छात्र प्रेरण कार्यक्रम ‘दीक्षारंभ–2026–27’ के तीसरे दिन विभिन्न शैक्षणिक, स्वास्थ्य जागरूकता, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक कौशल, सांस्कृतिक एवं अनुसंधानपरक गतिविधियों से विद्यार्थियों को परिचित कराया गया। दिनभर आयोजित विविध सत्रों का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा के व्यापक स्वरूप से अवगत कराने के साथ-साथ उन्हें महाविद्यालयीन जीवन, सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक मूल्यों एवं रचनात्मक गतिविधियों के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में वरिष्ठ प्राध्यापक (सस्य विज्ञान) डॉ. आर.बी. तिवारी के नेतृत्व में प्रथम वर्ष के नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय के फसल प्रदर्शन क्षेत्र का भ्रमण कराया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न फसलों, उनके विकास, प्रबंधन एवं प्रायोगिक प्रदर्शन का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को खेत एवं फसल प्रदर्शन क्षेत्र से जोड़ने का यह अवसर विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी रहा। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न फसलों एवं कृषि तकनीकों से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विषय विशेषज्ञों द्वारा सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समाधान किया गया। इससे विद्यार्थियों में कृषि विज्ञान को समझने के प्रति जिज्ञासा एवं उत्सुकता और अधिक बढ़ी।

द्वितीय सत्र में महाविद्यालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीलय तिवारी ने ‘स्वास्थ्य जागरूकता एवं स्वस्थ जीवन का महत्व’ विषय पर प्रेरक एवं उपयोगी व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वस्थ शरीर एवं स्वस्थ मन के महत्व से अवगत कराते हुए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, व्यक्तिगत स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवनशैली को विद्यार्थी जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में अपनाई गई अच्छी स्वास्थ्य आदतें भविष्य में स्वस्थ एवं उत्पादक जीवन की आधारशिला बनती हैं।

इसी सत्र के दौरान विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग में चयनित बी.एससी. कृषि चतुर्थ वर्ष के छात्र देवराज ने अपने अनुभव नवप्रवेशी विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए ‘माय भारत’ पोर्टल के महत्व एवं इससे उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न युवा गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया तथा अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि युवाओं के लिए उपलब्ध राष्ट्रीय स्तर के मंच व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसके पश्चात डॉ. एस.एल. स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, लोरमी-मुंगेली द्वारा ‘व्यक्तित्व विकास, सामाजिक कौशल, जागरूकता, नैतिकता एवं मूल्य’ विषय पर रोचक एवं प्रेरणादायक व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न रहते हुए संचार कौशल, व्यवहार कुशलता, नेतृत्व क्षमता, समय प्रबंधन, अनुशासन, सामाजिक संवेदनशीलता एवं नैतिक मूल्यों के विकास पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सफल कृषि स्नातक के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ प्रभावी व्यक्तित्व, सकारात्मक दृष्टिकोण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना भी आवश्यक है। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता एवं संवाद ने सत्र को और अधिक जीवंत बना दिया।

भोजन अवकाश के पश्चात तृतीय सत्र में वैज्ञानिक वानिकी एवं सांस्कृतिक प्रभारी अजीत विलियम्स द्वारा महाविद्यालय की सांस्कृतिक गतिविधियों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने विद्यार्थियों को महाविद्यालय में आयोजित होने वाली विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों, अंतर-महाविद्यालयीन युवा महोत्सव, रचनात्मक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों तथा विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने वाली गतिविधियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व, टीम भावना, रचनात्मकता एवं मंचीय अभिव्यक्ति विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को अपनी रुचि एवं प्रतिभा के अनुरूप विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

इसके पश्चात अनुसंधान प्रक्षेत्र भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. कार्मेंद्र चक्रधारी एवं जितेंद्र चौहान ने विद्यार्थियों को अनुसंधान प्रक्षेत्र में संचालित विभिन्न प्रयोगों से परिचित कराया। उन्होंने प्रयोगों की प्रकृति, उद्देश्य एवं कृषि अनुसंधान में उनके महत्व के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। विद्यार्थियों ने अनुसंधान प्रक्षेत्र में चल रहे प्रयोगों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और कृषि शिक्षा में अनुसंधान की भूमिका को समझा। इस भ्रमण से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि कृषि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि खेत, प्रयोगशाला और अनुसंधान प्रक्षेत्र इसके महत्वपूर्ण अंग हैं।

समग्र व्यक्तित्व विकास पर रहा विशेष जोर

‘दीक्षारंभ–2026–27’ के तीसरे दिन आयोजित गतिविधियों में ज्ञान, अनुभव, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक प्रतिभा तथा अनुसंधान—इन सभी पहलुओं को समाहित किया गया। इससे नवप्रवेशी विद्यार्थियों को महाविद्यालयीन जीवन के विभिन्न आयामों को समझने और अपने भविष्य की दिशा निर्धारित करने में सहायता मिली।

कार्यक्रम के सभी तकनीकी एवं प्रायोगिक सत्रों में महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन.के. चौरे, महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों एवं संबंधित अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। अधिष्ठाता डॉ. चौरे ने विद्यार्थियों को कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेने तथा कृषि शिक्षा के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।

‘दीक्षारंभ–2026–27’ कार्यक्रम के तीसरे दिन की गतिविधियों ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि कृषि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, व्यावहारिक ज्ञान, स्वस्थ जीवनशैली, नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता, सांस्कृतिक चेतना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व से युक्त एक सक्षम एवं संवेदनशील कृषि स्नातक तैयार करना है।

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