कृषि महाविद्यालय बिलासपुर का 25वां स्थापना दिवस उल्लासपूर्ण माहौल में मनाया गया

25 वर्षों की गौरवशाली यात्रा में शिक्षा, अनुसंधान और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में महाविद्यालय ने बनाई विशिष्ट पहचान
बिलासपुर। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर का 25वां स्थापना दिवस समारोह उल्लास, गरिमा और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में रजत जयंती वर्ष की उपलब्धियों, संस्थान की गौरवशाली यात्रा और भविष्य की संभावनाओं को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। वर्ष 2001 में शिक्षा एवं कृषि विज्ञान का जो बीज रोपा गया था, वह आज 25 वर्षों की सतत यात्रा में एक सशक्त एवं फलदायी वृक्ष का रूप ले चुका है, जिसकी छाया में विद्यार्थी, किसान, वैज्ञानिक और ग्रामीण समाज लाभान्वित हो रहे हैं।

मां सरस्वती एवं बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल जी का किया गया स्मरण
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन.के. चौरे एवं उपस्थित अतिथियों द्वारा ज्ञान की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा तथा महाविद्यालय के प्रेरणास्रोत बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन के साथ ही परिसर ज्ञान, अनुसंधान, सेवा और कृषि विकास के संकल्प से आलोकित हो उठा।
इस अवसर पर उपस्थित महाविद्यालय परिवार ने मां सरस्वती से शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर प्रगति तथा किसानों और ग्रामीण समाज की सेवा के लिए संस्थान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रार्थना की।
25 वर्षों की यात्रा का प्रस्तुत किया गया प्रतिवेदन
स्वागत उद्बोधन में डॉ. एन.के. चौरे, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने महाविद्यालय की 25 वर्षों की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि वहां से निकलने वाले ज्ञान, शोध, संस्कार और समाजोपयोगी कार्यों से होती है।
उन्होंने महाविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान ने विगत वर्षों में कृषि शिक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ अनुसंधान और किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों के हस्तांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महाविद्यालय ने बदलती कृषि परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, टिकाऊ कृषि, पर्यावरणीय चुनौतियों तथा ग्रामीण विकास से जुड़े विषयों पर कार्य करते हुए अपनी उपयोगिता को निरंतर विस्तार दिया है।
उन्होंने कहा कि 25 वर्षों की यह यात्रा केवल एक संस्थान की यात्रा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, किसानों और समाज के सामूहिक योगदान की कहानी है।
विद्यार्थियों से ज्ञान को समाज की सेवा से जोड़ने का आह्वान
समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ. एस.एल. स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी-मुंगेली ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसानों और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कक्षा में अर्जित ज्ञान को खेत और गांव तक पहुंचाने का प्रयास करें तथा कृषि क्षेत्र में आने वाली नई चुनौतियों को अवसर में बदलने के लिए नवाचार एवं अनुसंधान की भावना विकसित करें।
उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
कृषि अनुसंधान और किसानों से जुड़ाव को बताया महत्वपूर्ण
डॉ. एस.के. वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर ने महाविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि कृषि शिक्षा और अनुसंधान का अंतिम उद्देश्य किसानों की आय, कृषि उत्पादकता तथा ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र के बीच बेहतर समन्वय से क्षेत्र की कृषि समस्याओं के अधिक प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
उन्होंने महाविद्यालय की 25 वर्षों की यात्रा को उपलब्धियों से भरी यात्रा बताते हुए भविष्य में शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार और नवाचार को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
25 वर्षों की उपलब्धियों को बताया सामूहिक प्रयास
डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर ने महाविद्यालय की 25 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी संस्थान की सफलता उसके विद्यार्थियों, शिक्षकों और वैज्ञानिकों की उपलब्धियों के साथ-साथ समाज के प्रति उसकी उपयोगिता से भी निर्धारित होती है। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है और महाविद्यालय के साथ बेहतर समन्वय से कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में और अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि 25 वर्षों में संस्थान ने शिक्षा और कृषि विज्ञान के क्षेत्र में जो आधार तैयार किया है, उसे आने वाले वर्षों में नवाचार, आधुनिक तकनीक और स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान के माध्यम से और मजबूत किया जाना चाहिए।
विद्यार्थियों में दिखा विशेष उत्साह
रजत जयंती के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। विद्यार्थियों ने स्थापना दिवस को केवल एक समारोह के रूप में नहीं, बल्कि संस्थान की गौरवशाली विरासत से जुड़ने और उसके भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका समझने के अवसर के रूप में लिया।
समारोह में कृषि महाविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर के प्राध्यापकगण, वैज्ञानिकगण, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की उपलब्धियों, वर्तमान गतिविधियों तथा भविष्य की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक वातावरण बना रहा।
25 वर्षों से भविष्य की ओर बढ़ता संस्थान
बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र की 25 वर्षों की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा और अनुसंधान जब समाज की आवश्यकताओं से जुड़ते हैं, तो उनका प्रभाव दूर तक दिखाई देता है। वर्ष 2001 में बोया गया शिक्षा का बीज आज एक ऐसे युवा वृक्ष के रूप में विकसित हो चुका है, जिसकी शाखाएं कृषि शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास तक फैली हैं।
रजत जयंती का यह अवसर अतीत की उपलब्धियों को स्मरण करने के साथ-साथ आने वाले वर्षों के लिए नए संकल्प लेने का अवसर भी बना। महाविद्यालय परिवार ने संस्थान को शिक्षा, अनुसंधान और किसान सेवा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।
संचालन एवं आभार
कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन वैज्ञानिक अजीत विलियम्स ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न कड़ियों को सहजता एवं गरिमापूर्ण ढंग से जोड़ते हुए अतिथियों, प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों की सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया।
अंत में स्थापना दिवस समारोह ने महाविद्यालय की 25 वर्षों की उपलब्धियों को स्मरण करते हुए एक नए संकल्प का संदेश दिया—ज्ञान से कृषि को समृद्ध करना, अनुसंधान से समस्याओं का समाधान खोजना और शिक्षा के माध्यम से समाज के भविष्य को सशक्त बनाना।