पंचायतों से उठा बेलतरा का सियासी तूफान,12 सवालों के साथ 13 अक्टूबर को कलेक्टोरेट घेराव,बेलतरा विधायक के नोटिस के बाद भड़के कांग्रेसी

बिलासपुर।बेलतरा में जमीन के सीमांकन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पंचायतों के कामकाज और प्रशासनिक फैसलों तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेताओं, सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों ने एक साथ 12 सूत्रीय शिकायतें जिला प्रशासन के सामने रखी हैं। इनमें पंचायतों में काम, भुगतान, ठेकेदारों, सचिवों के स्थानांतरण से लेकर कथित राजनीतिक दबाव और रेत-मुरुम के उत्खनन तक के मामले शामिल हैं। इन शिकायतों की जांच की मांग के साथ 13 अक्टूबर को कलेक्टोरेट घेराव का ऐलान किया गया है।
मामला केवल आरोप लगाने तक सीमित नहीं है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने उन मामलों का रिकॉर्ड खंगालने की मांग रखी है, जिनमें उनके अनुसार राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतें सामने आई हैं। सवाल यह उठाया गया है कि क्या पंचायतों में काम शुरू होने से पहले किसी तरह का अग्रिम भुगतान हुआ, क्या ठेकेदारों के चयन को लेकर दबाव बनाया गया और क्या इसका विरोध करने वाली पंचायतों के विकास कार्य या सचिव प्रभावित हुए।
इसी कड़ी में धनंजय सिंह से जुड़े सीमांकन, नोटिस और पंचायत सचिव के स्थानांतरण का मामला भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। आंदोलनकारियों ने कांग्रेस विचारधारा से जुड़े अन्य पंचायत प्रतिनिधियों की शिकायतों की भी जांच की मांग रखी है।पंचायतों के बाद शिकायतों का दायरा सीधे खनिज गतिविधियों तक पहुंचता है। रेत और मुरुम के कथित अवैध उत्खनन, ठेकेदारों को किए गए भुगतानों और कथित अनुचित धन वसूली की जांच की मांग भी उठाई गई है। अधिकारियों पर कथित राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक स्तर पर दबाव की शिकायतों को भी 12 सूत्रीय मांगों में शामिल किया गया है।
सीमांकन विवाद ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान
बेलतरा में सीमांकन को लेकर कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष एवं सेलर सरपंच धनंजय सिंह ठाकुर और विधायक सुशांत शुक्ला के बीच आरोप-प्रत्यारोप पहले ही सामने आ चुके हैं। धनंजय सिंह की ओर से विधायक पर प्रशासनिक दबाव का आरोप लगाया गया था। इसके जवाब में विधायक की ओर से मानहानि का नोटिस भेजे जाने की बात सामने आई है। विधायक ने आरोपों को निराधार बताते हुए सीमांकन को प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।अब पंचायतों से जुड़ी शिकायतों को इसी राजनीतिक विवाद की व्यापक पृष्ठभूमि में जिला प्रशासन के सामने रखा गया है। आंदोलनकारियों की मांग है कि शिकायतों की जांच किसी राजनीतिक प्रभाव से अलग होकर की जाए और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
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पंचायतों से उठा बेलतरा का सियासी तूफान, 12 सवालों के साथ 13 अक्टूबर को कलेक्टोरेट घेराव—विजय केशरवानी ने कहा.., सत्ता बदलती है, रिकॉर्ड कायम रहता है
बेलतरा में 12 सवालों से गरमाई सियासत, 13 अक्टूबर को कलेक्टोरेट घेराव—विजय केशरवानी बोले, सत्ता बदलती है, रिकॉर्ड कायम रहता है
Bhaskar Mishra
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October 3, 2026
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पंचायतों से उठा बेलतरा का सियासी तूफान, 12 सवालों के साथ 13 अक्टूबर को कलेक्टोरेट घेराव—विजय केशरवानी ने कहा.., सत्ता बदलती है, रिकॉर्ड कायम रहता है
बिलासपुर… बेलतरा में जमीन के सीमांकन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पंचायतों के कामकाज और प्रशासनिक फैसलों तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेताओं, सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों ने एक साथ 12 सूत्रीय शिकायतें जिला प्रशासन के सामने रखी हैं। इनमें पंचायतों में काम, भुगतान, ठेकेदारों, सचिवों के स्थानांतरण से लेकर कथित राजनीतिक दबाव और रेत-मुरुम के उत्खनन तक के मामले शामिल हैं। इन शिकायतों की जांच की मांग के साथ 13 अक्टूबर को कलेक्टोरेट घेराव का ऐलान किया गया है।नक्शे देखें
मामला केवल आरोप लगाने तक सीमित नहीं है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने उन मामलों का रिकॉर्ड खंगालने की मांग रखी है, जिनमें उनके अनुसार राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतें सामने आई हैं। सवाल यह उठाया गया है कि क्या पंचायतों में काम शुरू होने से पहले किसी तरह का अग्रिम भुगतान हुआ, क्या ठेकेदारों के चयन को लेकर दबाव बनाया गया और क्या इसका विरोध करने वाली पंचायतों के विकास कार्य या सचिव प्रभावित हुए।
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इसी कड़ी में धनंजय सिंह से जुड़े सीमांकन, नोटिस और पंचायत सचिव के स्थानांतरण का मामला भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। आंदोलनकारियों ने कांग्रेस विचारधारा से जुड़े अन्य पंचायत प्रतिनिधियों की शिकायतों की भी जांच की मांग रखी है।
पंचायतों के बाद शिकायतों का दायरा सीधे खनिज गतिविधियों तक पहुंचता है। रेत और मुरुम के कथित अवैध उत्खनन, ठेकेदारों को किए गए भुगतानों और कथित अनुचित धन वसूली की जांच की मांग भी उठाई गई है। अधिकारियों पर कथित राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक स्तर पर दबाव की शिकायतों को भी 12 सूत्रीय मांगों में शामिल किया गया है।
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सीमांकन विवाद ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान
बेलतरा में सीमांकन को लेकर कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष एवं सेलर सरपंच धनंजय सिंह ठाकुर और विधायक सुशांत शुक्ला के बीच आरोप-प्रत्यारोप पहले ही सामने आ चुके हैं। धनंजय सिंह की ओर से विधायक पर प्रशासनिक दबाव का आरोप लगाया गया था। इसके जवाब में विधायक की ओर से मानहानि का नोटिस भेजे जाने की बात सामने आई है। विधायक ने आरोपों को निराधार बताते हुए सीमांकन को प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।
अब पंचायतों से जुड़ी शिकायतों को इसी राजनीतिक विवाद की व्यापक पृष्ठभूमि में जिला प्रशासन के सामने रखा गया है। आंदोलनकारियों की मांग है कि शिकायतों की जांच किसी राजनीतिक प्रभाव से अलग होकर की जाए और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
केशरवानी बोले,सरकारें आती-जाती हैं,रिकॉर्ड रहता है
बैठक में विजय केशरवानी ने अधिकारियों को लेकर कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन संविधान और कानून कायम रहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी राजनीतिक प्रभाव में आकर बदले की कार्रवाई या नियम-विरुद्ध काम में सहभागी बनता है तो हर कार्रवाई का रिकॉर्ड रहता है।
केशरवानी ने अधिकारियों से किसी व्यक्ति के दबाव के बजाय संविधान और कानून के अनुसार काम करने की अपील की। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब बेलतरा में राजनीतिक विवाद जमीन के सीमांकन से निकलकर पंचायतों के कामकाज और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े सवालों तक पहुंच गया है।