
जर्जर सड़कों की प्रशासनिक स्वीकृति न मिलने पर जिला पंचायत सदस्य आज से करेंगे भूख हड़ता
जिला पंचायत सदस्य दामोदर कांत का बड़ा ऐलान
बिलासपुर । मस्तुरी क्षेत्र के अंतर्गत जर्जर सड़कों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को लेकर जिला पंचायत सदस्य दामोदर कांत ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने घोषणा की है कि यदि एक महीने के भीतर सड़कों के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलती है।तो वे 2 नवंबर को दोपहर 12 बजे से भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

उन्होंने कहा है कि
भूख हड़ताल 2 नवंबर की दोपहर 12 बजे से शुरू होगा।
जो फोरलेन सड़क, लावर मोड़, दरीघाट, मस्तुरी में होगा।
इसमें जिला पंचायत सदस्य दामोदर कांत द्वारा क्षेत्र की तीन प्रमुख और जर्जर सड़कों की मांग लंबे समय से की जा रही है, जिसमें लावर, कोनी, पाली, ईंटवा, सरसेनी, मटिया, ठाकुरदेवा, खपरी, गिधपुरी, बकरकुदा और केवतरा, जलसो, भरारी, केंवटाडीह टांगर आदि क्षेत्र शामिल हैं।
दामोदर कांत ने स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा जिन सड़कों का जिक्र किया गया है, वे शासन के लोक निर्माण विभाग के बजट में शामिल हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। उन्होंने कुछ लोगों द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों का खंडन करते हुए कहा कि क्षेत्र के विकास और जनहित के मुद्दों को लेकर वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और जनता के विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करते रहेंगे।सड़को के लिए वे हर स्तर की लड़ाई लड़ने को तैयार है।और यह लड़ाई अनिश्चितकालीन रहेगा।इसके लिए कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
सड़क निर्माण के लिए भूख हड़ताल करने जा रहे जिला पंचायत सदस्य दामोदर कांत को दबाने की कोशिश
क्षेत्र की जर्जर सड़कों – लावर से गिधपुरी, केवतरा से चिल्हाटी और बकरकुदा से मटिया पहुँच मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर जिला पंचायत सदस्य दामोदर कांत द्वारा 2 नवंबर को लावर मोड़ में भूख हड़ताल पर बैठने के ऐलान के बाद अब कांग्रेस के अंदर ही घमासान मच गया है।इस बीच कांग्रेस के कई लोग पक्ष में है तो कुछ लोग नाराज है।जिसके कारण मस्तूरी कांग्रेस
में भी दो गुट होने की आशंका है।
*अच्छी पहल को दबाने की कोशिश – समर्थकों में आक्रोश*
वहीं दूसरी तरफ दामोदर कांत के समर्थकों और क्षेत्र के ग्रामीणों में इस बयान को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब एक जनप्रतिनिधि जनता की मूलभूत समस्या सड़क के लिए लड़ाई लड़ रहा है, तो उसी की पार्टी के दूसरे जनप्रतिनिधि द्वारा उसकी टांग खींचना और उसकी कार्यशैली पर सवाल उठाना कहीं न कहीं अच्छी पहल को दबाने की कोशिश है।



