बार काउंसिल चुनाव मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई बीसीआई के अधिवक्ता हुए पेश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्यों की सामान्य सभा की बैठक स्थगित करने के आदेश देने के मामले में आज हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई हुई। हाईकोर्ट में पेश हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिवक्ताओं ने अदालत के सामने पक्ष रखा। अधिवक्ताओं ने बताया कि उन्होंने मामला बिलासपुर हाईकोर्ट से किसी अन्य हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। जिसमें सुनवाई होनी है। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद 14 जनवरी को शपथ पत्र में जवाब देने के निर्देश बार काउंसिल ऑफ इंडिया को दिए है।
छत्तीसगढ़ स्टेट बर काउंसिल आफ इंडिया के निर्वाचित सदस्यों की सामान्य सभा की बैठक 9 जनवरी को रखी गई थी। इसमें छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल के पदाधिकारियों का चुनाव होना था। इससे पहले बार काउंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने चुनाव में धांधली के आरोपों में सामान्य सभा की बैठक स्थगित कर दी है। आरोप है कि स्टेट बार काउंसिल के चुनाव में भारी भ्रष्टाचार करते हुए चार पहिया वाहन से लेकर नगदी के प्रलोभन दिए गए। जिसके लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज और दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दिया और दस दिनों में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
बार कौंसिल ऑफ इंडिया के निर्णय को चुनौती देते हुए बीपी सिंह, जेके त्रिपाठी, अशोक तिवारी, फैजल रिजवी, संतोष वर्मा, चंद्र प्रकाश जांगड़े सहित 19 निर्वाचित सदस्यों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। निर्वाचित सदस्यों की याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच में हुई पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने कहा था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव अफवाह के आधार पर नहीं रोका जाना चाहिए। सामान्य सभा की मीटिंग स्थगित करने के पीछे बीसीआई को ठोस कारण बताना होगा। इसके साथ ही बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया से जवाब मांगा था।
आज मामले की सुनवाई में बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया के अधिवक्ताओं ने पेश होकर बताया कि उन्होंने याचिका को छत्तीसगढ़ से बाहर किसी और हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। जवाब सुनने के बाद अदालत ने शपथ पत्र में 14 जनवरी को जवाब देने के निर्देश दिए है।