अतिथि व्याख्याताओं ने अपनी मांगों को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री से की मुलाकात

बिलासपुर ।छत्तीसगढ़ के अतिथि व्याख्याताओं ने 250-300 की बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपनी न्यायोचित मांगों—एकमुश्त ₹57,700 मासिक मानदेय, सेवा सुरक्षा, 12 माह का कार्यकाल, 13 वार्षिक सीएल, सम्मानजनक पदनाम एवं नीति-2024 में आवश्यक संशोधन—को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के शंकरनगर स्थित शासकीय निवास पर अपना पक्ष रखा।
दुर्भाग्यवश मंत्री ₹2,000 प्रतिदिन मानदेय की प्रस्तावित व्यवस्था पर ही अडिग रहे। हमारी एकमुश्त मासिक वेतन की मूल मांग पर कोई स्पष्ट आश्वासन या सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। प्रतिनिधिमंडल की पूरी बात सुने बिना ही वे वहाँ से प्रस्थान कर गए, जिससे उपस्थित अतिथि व्याख्याताओं में गहरी निराशा एवं असंतोष व्याप्त हो गया। इसके पश्चात अतिथि व्याख्याताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण ढंग से नारे लगाकर विरोध दर्ज कराया।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की उच्च शिक्षा, शिक्षकों के सम्मान और न्यायसंगत सेवा शर्तों के लिए है। जब तक हमारी जायज़ मांगों पर सार्थक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हमारा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक संघर्ष जारी रहेगा। सरकार के द्वारा बनी कमिटी ने वर्ष 2024 में बनी अतिथि व्याख्याता नीति से 4 कालखंड का 500 प्रति क्लास के हिसाब से 2000 बन जाता था अध्यापन के अतिरिक्त महाविद्यालय का अन्य कार्य करने पर 400 इस तरह अतिथि व्याख्याता का प्रति दिन 2400 रुपए बनते थे जिससे उनको 50000 ₹ का वेतन मिला करता था, परंतु वर्तमान कमिटी ने 2000 ₹ प्रति दिवस वेतन निर्धारित किया है एवं अन्य कार्य का राशि नहीं दिया जा रहा है इस तरह अतिथि व्याख्याताओं को रविवार एवं अन्य सरकारी अवकाश का वेतन नहीं बन पाने के कारण उनके कभी 50000 वेतन नहीं मिल पाएंगे, कमिटी को अगर सरकार का पैसा बचाना है तो 3000 अतिथि व्याख्याताओं को हरियाणा राज्य के तर्ज पर 5 सत्र कार्य कर चुके सभी अतिथि व्याख्याता को सेवा निवृत आयु तक सामाजिक सुरक्षा के साथ 57700 ₹ एकमुश्त वेतन प्रदान किया जाये, ताकि रिक्त पद को पूर्ण किया जा सके एवं छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को अतिथि व्याख्याता भर्ती में प्राथमिकता नहीं दिया जा रहा है प्रशासन ने अतिथि व्याख्याता नीति 2024 के कंडिका क्रमांक 5.4 में छत्तीसगढ़ को प्राथमिकता की व्याख्या इस प्रकार किया है कि छत्तीसगढ़ का अभ्यर्थी अगर श्रेणी एवं मेरिट प्वाइंट के बराबर होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ निवासी को प्राथमिकता मिलेगा कहना है जबकि वर्ष 2020 से 2023 के कोरोना महामारी के कारण इस 3 वर्ष में सभी परीक्षार्थी घर रहकर परीक्षा दिए हैं जिसके कारण उनका प्रतिशत वर्ष 2020 से पहले और 2023 के बाद वाले परीक्षार्थी एग्जाम सेंटर में जाकर परीक्षा दिए है जिसके कारण महामारी के समय के परीक्षार्थी का प्रतिशत कही अधिक है इसलिए मेरिट प्वाइंट को विलोपित करते हुए छत्तीसगढ़ के अतिथि व्याख्याता को सत्र 2026-2027 के नए आवेदन में तथा विस्थापन में छत्तीसगढ़ के अतिथि व्याख्याता को श्रेणी के आधार पर प्राथमिकता दिया जाए और मेरिट प्वाइंट को हटाया जाए ताकि छत्तीसगढ़ के नेट सेट पीएचडी एम फ़िल. अभ्यर्थियों का चयन हो सके।