अमृत मिशन 2.0 में बड़ा खेल? बिना पाइपलाइन बिछाए कर दिया सड़क रेस्टोरेशन

ठेकेदार बेलगाम, अधिकारी खामोश, 47 करोड़ों की योजना पर उठे गंभीर सवाल
तखतपुर : नगर पालिका में करीब 47 करोड़ रुपये की लागत से संचालित अमृत मिशन 2.0 की पेयजल पाइपलाइन परियोजना अब विकास से अधिक विवादों का विषय बनती जा रही है। शहर में लगभग 36 किलोमीटर पाइपलाइन विस्तार के लिए सड़कों की खुदाई की गई, लेकिन रेस्टोरेशन कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाला मामला वार्ड क्रमांक 9 के पटेल मोहल्ला का है, जहां पाइपलाइन डाले बिना ही गड्ढे को मिट्टी से भरकर उसके ऊपर कंक्रीट सड़क बना दी गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं, जबकि गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारी और इंजीनियर मौके से नदारद हैं।

ऐसे में करोड़ों रुपये की इस योजना की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
रेस्टोरेशन कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी लगातार शिकायतें मिल रही हैं। आरोप है कि सड़क निर्माण में बेस तैयार करने से लेकर निर्माण सामग्री के अनुपात तक तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सड़क की नींव मजबूत नहीं होगी तो ऊपर डाली गई कंक्रीट पहली ही बारिश में धंस सकती है या उखड़ सकती है। दूसरी ओर, बरसात शुरू होने के बावजूद कई स्थानों पर खुले गड्ढे में मिट्टी पाटने से जमीन कीचड़ युक्त हो गया है जो हादसों को न्योता दे रहे हैं, जिससे नागरिकों की परेशानी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि टिकाऊ सड़कें और बेहतर पेयजल व्यवस्था नहीं मिलती, तो यह जनता के टैक्स के पैसे का सीधा दुरुपयोग है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस करोड़ो रुपये की लागत वाली परियोजना की निगरानी कौन कर रहा है। जिन अधिकारियों पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, उनकी कथित निष्क्रियता और चुप्पी लोगों के बीच संदेह और आक्रोश पैदा कर रही है। नागरिकों ने पूरे निर्माण और रेस्टोरेशन कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि जांच में गुणवत्ता से समझौता, नियमों की अनदेखी या वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। अन्यथा अमृत मिशन 2.0 तखतपुर में विकास की पहचान बनने के बजाय लापरवाही, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता की मिसाल बनकर रह जाएगी।