अलनीनो से बदलेगा रबी फसलों का गणित
‘पहले नमी, फिर फसल’ के आधार पर होगा फसल नियोजन

बिलासपुर- कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक नमी, कुछ क्षेत्रों में लंबे समय तक नमी की कमी जैसी विपरीत परिस्थितियां एक साथ सामने आ सकती है। रबी फसलों में यह स्थिति गहरे तक प्रभाव डालेगी क्योंकि मजबूत होने लगा है अलनीनो।
चिंतित हैं कृषि और मौसम विज्ञानी जलवायु परिवर्तन और अलनीनो का विस्तार देखकर। छत्तीसगढ़ में इसका विशेष प्रभाव इसलिए गहरे तक पड़ेगा क्योंकि प्रदेश की कृषि व्यवस्था का बड़ा हिस्सा, मानसूनी बारिश, मिट्टी में संचित नमी और सीमित सिंचाई संसाधनों पर निर्भर हैं। इसलिए अब नमी आधारित फसल नियोजन माॅडल अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

संकट छत्तीसगढ़ के लिए ज्यादा
अलनीनो का विस्तार छत्तीसगढ़ के लिए इसलिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि राज्य की कृषि व्यवस्था का बड़ा हिस्सा मानसूनी वर्षा, संचित नमी और सीमित सिंचाई संसाधनों पर निर्भर है। राज्य के तीन प्रमुख कृषि जलवायु क्षेत्र -छत्तीसगढ़ का मैदान, उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र और बस्तर का पठार- में कृषि परिस्थितियां अलग-अलग हैं। इन तीनों क्षेत्रों में मानसूनी बारिश के अलग-अलग स्वरुपों की पहचान हुई है।

अब नमी सबसे बड़ी पूंजी
वर्षा आश्रित छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में जिस तरह अलनीनो विस्तार ले रहा है उसे देखते हुए ‘पहले नमी देखें फिर फसल का चयन करें’ यह संदेश दे रहे कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि रबी फसल की तैयारी में सबसे पहले खेतों में नमी का आकलन करना आवश्यक होगा। बोनी का महीना और तारीख देखकर बुआई करना जोखिम बढ़ा सकता है। जलवायु परिवर्तन और अलनीनो के विस्तार में अब उत्पादन के साथ नमी भी सबसे बड़ी पूंजी बनती नजर आ रही है।
नमी आधारित फसल नियोजन माॅडल
अलनीनो के दौर में खेतों में नमी बनाए रखना सबसे बड़ी पूंजी बनने वाली है क्योंकि प्रदेश का बड़ा हिस्सा मानसूनी बारिश पर निर्भर है। इसलिए रबी फसल की बोनी के पूर्व फसल अवशेष खेतों में बनाए रखें क्योंकि नमी संचय करके रखता है फसल अवशेष। अधिक जुताई नमी को तेजी से खत्म करती है इसलिए न्यूनतम जुताई करें।समय का विशेष ध्यान रखना होगा क्योंकि इससे प्रारंभिक सिंचाई पर होने वाले जल के खर्चे से बचा जा सकेगा। खेतों की मेड़बंदी और खेत तालाब, खेत डबरी जैसे उपाय तुरंत करने होंगे।
वर्जन
खेत की नमी महत्वपूर्ण संसाधन
अलनीनो और बदलते मौसम के दौर में रबी फसलों के लिए खेत की नमी सबसे महत्वपूर्ण संसाधन होगी। किसानों को बोनी से पहले मिट्टी की नमी का आकलन कर फसल का चयन करना चाहिए। फसल अवशेष संरक्षण, न्यूनतम जुताई, मेड़बंदी तथा खेत-डबरी जैसे जल-संरक्षण उपाय नमी बचाने में सहायक होंगे। कृषि वानिकी में वृक्षों का उचित चयन और प्रबंधन भी मिट्टी की नमी संरक्षण तथा जलवायु जोखिम कम करने की दीर्घकालिक रणनीति बन सकता है।
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर