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उर्वरक विक्रेता कृपया ध्यान दें…!

रकबे के आधार पर ही करें विक्रय

भाटापारा- निजी उर्वरक विक्रेता कृपया ध्यान दें। उर्वरक का विक्रय केवल वास्तविक किसानों को उनके रकबे के आधार पर ही करें। कृषि विभाग ने जारी इस आदेश में यह भी कहा है कि क्रय करने वाले किसानों की संपूर्ण जानकारी लिखित में रखें। इसका सत्यापन नियमित समयावधि में विभाग करेगा।

खरीफ सत्र चालू हो चुका है। किसानों के साथ विभाग ने भी खाद और बीज की व्यवस्था पुख्ता करने की ठानी हुई है लेकिन ज्यादा ध्यान और सतर्कता, उर्वरक विक्रय की व्यवस्था पर बरती जा रही है। शुरुआत उस खुले बाजार से हो चुकी हैं, जहां से किसान सबसे ज्यादा पीड़ित होते रहे हैं। लिहाजा उर्वरक विक्रय संस्थानों को कुछ ऐसे नियम मानने होंगे, जिन्हें अब तक वह गैरजरूरी मानता रहा है।


निजी उर्वरक विक्रेता ध्यान दें

निजी उर्वरक विक्रेता संस्थानों को केवल किसानों को ही उपलब्ध रकबा के आधार पर उर्वरक विक्रय करने की अनुमति होगी। किसानों का नाम,पता, मोबाइल नंबर,खसरा नंबर, रकबा और विक्रय किए जा रहे उर्वरक की कुल मात्रा अनिवार्य रूप से लिखित में दर्ज करने के सख्त आदेश जारी हो चुके हैं। इनकी जांच और सत्यापन निश्चित समयावधि के भीतर विभाग के अधिकारी करेंगे।


इसलिए यह व्यवस्था

रासायनिक उर्वरक विक्रेताओं के लिए जारी इस सख्त आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह नई व्यवस्था भविष्य में प्रस्तावित ई- वितरण प्रणाली के प्रस्तावित क्रियान्वयन एवं भूमि के अनुसार उर्वरक प्रदायगी के आंकड़ों के सत्यापन के लिए जरूरी है। लिहाजा सतर्कता बेहद आवश्यक है। जांच के दौरान आदेशों का उल्लंघन होना प्रमाणित हुआ तो उर्वरक नियंत्रण आदेश के प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।


टोकन में मिलेगा उर्वरक

धान की तरह अब उर्वरक वितरण प्रणाली में भी टोकन की व्यवस्था नजर आने वाली है। जानकारी के अनुसार ऋणी और अऋणी किसान अपने ब्लॉक के अधीन सहकारी समिति एवं निजी विक्रय केन्द्रों से उर्वरक की उपलब्धता के अनुसार खरीदी के लिए टोकन कटवा सकेंगे। अहम व्यवस्था यह कि ऋणी किसानों को सहकारी समिति अथवा निजी विक्रय केंद्रों से खरीदी की छूट होगी जबकि अऋणी किसान केवल निजी क्षेत्र से ही उर्वरक की खरीदी कर सकेंगें।

वर्जन
केवल किसानों को ही विक्रय करने के निर्देश

खंड क्षेत्र की निजी उर्वरक विक्रेता संस्थानों को सिर्फ किसानों को ही उर्वरक विक्रय करने के निर्देश दिए गए हैं। रकबे के आधार पर विक्रय और टोकन की व्यवस्था भविष्य में प्रस्तावित ई- वितरण प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन एवं भूमि के आधार पर उर्वरक प्रदायगी के आंकड़ों के सत्यापन के लिए जरूरी है।
-अवधेश उपाध्याय, उर्वरक निरीक्षक, भाटापारा

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