एक पेड़ माँ के नाम अभियान से हरित हुआ महामाया महाविद्यालय परिसर

एनएसएस की अनूठी पहल—महाविद्यालय में 150 पौधे रोपे, गोदग्राम घासीपुर में 150 पौधों का निःशुल्क वितरण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
रतनपुर | वासित अली की रिपोर्ट
पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के संकल्प के साथ शासकीय महामाया महाविद्यालय, रतनपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) छात्र एवं छात्रा इकाइयों ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत जुलाई के अंतिम सप्ताह में व्यापक वृक्षारोपण एवं पौध वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। अभियान के दौरान महाविद्यालय परिसर एवं आसपास 150 पौधों का रोपण किया गया, वहीं 30 जुलाई 2026 को गोदग्राम घासीपुर में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों और विद्यार्थियों को 150 पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया।

अभियान के अंतर्गत जामुन, सीताफल, शहतूत, कटहल, मुनगा, अर्जुन, हर्रा, बहेड़ा, आँवला, नीम, कचनार, अमलतास, गुलमोहर, करंज, साल, शीशम सहित फलदार, फूलदार, औषधीय एवं छायादार प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इसका उद्देश्य महाविद्यालय परिसर की हरियाली बढ़ाने के साथ जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करना है।
गोदग्राम घासीपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों और विद्यार्थियों को वृक्षों के महत्व, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी की भूमिका के प्रति जागरूक किया। साथ ही सभी से पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल का संकल्प भी दिलाया गया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. के. लहरे ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान मातृ सम्मान के साथ प्रकृति संरक्षण का सशक्त संदेश देता है और यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे तो यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
एनएसएस छात्र इकाई के कार्यक्रम अधिकारी श्री देवलाल उइके एवं छात्रा इकाई की कार्यक्रम अधिकारी सुश्री अर्पणा गौतम ने बताया कि स्वयंसेवक पौधों के संरक्षण, सिंचाई और देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाएंगे, ताकि लगाए गए सभी पौधे विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
उल्लेखनीय है कि इस अभियान के बाद शासकीय महामाया महाविद्यालय, रतनपुर परिसर में अब लगभग 70 विभिन्न प्रजातियों के पादप उपलब्ध हैं, जो महाविद्यालय की हरित पहल और जैव विविधता संरक्षण के प्रति उसकी सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम में एनएसएस स्वयंसेवकों, महाविद्यालय परिवार और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे अभियान सफल एवं प्रेरणादायी साबित हुआ।