कोर्ट ने पिता को खुदकुशी के लिए मजबूर करने वाले बेटा-बहू को किया दोषमुक्त….सुसाइट नोट की जांच भी नहीं कराई

पुलिस ने कथित सुसाइट नोट की जांच भी नहीं कराई थी
बिलासपुर। दशम अपर सत्र न्यायाधीश आदित्य जोशी ने पिता को प्रताड़ित कर खुदकुशी के लिए मजबूर करने के आरोप से पुत्र, बहू एवं रिश्तेदार को इस आधार पर दोषमुक्त किया कि अभियोजन पक्ष ने कथित रूप से ज’ की गई सुसाइट नोट की जांच नहीं कराई और कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जिससे आरोप सिद्ब हो सके। संपत्ति संबंधी विवाद के कारण उन्हें झुठे मुकदमा में फंसाया गया था।
दयालबंद शिखा बाटिका निवासी छेदीलाल कश्यप ने 24 मार्च 2०23 को घर में ही फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। सिटी कोतवाली पुलिस ने सूचना पर मर्ग कायम कर मामले को विवेचना में लिया। मृतक की पत्नी, पुत्र विनय कश्यप ने अपने भाई विक्रम कश्यप, भाभी पूनम कश्यप एवं रिश्तेदार ऋषभ पनिकर पर पिता को प्रताड़ित कर खुदकुशी के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया। उनके बयान के आधार पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ धारा 3०6, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ब कर न्यायालय में चालान पेश किया गया।
मामले की दसश अपर सत्र न्यायाधीश आदित्य जोशी की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अधिवक्ता आलोक गुप्ता ने तर्क प्रस्तुत करते हुए बताया कि आरोपी निर्दोष हैं, उन्हें झुठे मामले में फंसाया गया है। मृतक एवं गवाहों के मध्य संपत्ति बटवारा को लेकर विवाद था। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा जिससे इनके खिलाफ धारा 3०6 का अपराध सिद्ब हो सके। इसके अलावा अभियोजन पक्ष ने कथित रूप से ज’ सुसाइट नोट का हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से जांच नहीं कराई है। इस आधार पर कोर्ट ने तीनों को दोषमुक्त किया है।